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शिक्षक दिवस पर शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर: कोडरमा के 674 स्कूलों में नहीं हैं नियमित हेडमास्टर, प्रभारी के भरोसे संचालन

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Samachar Post रिपोर्टर,कोडरमा : शिक्षक दिवस के मौके पर जहां शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सम्मानित किया जा रहा है, वहीं कोडरमा जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था कई सवाल खड़े करती है। जिले के करीब 674 सरकारी स्कूलों में एक भी नियमित हेडमास्टर नहीं है। सभी स्कूल फिलहाल प्रभारी हेडमास्टर के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में जिले के करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ स्कूलों के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी भी शिक्षकों के कंधों पर है।

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674 स्कूल, लेकिन एक भी नियमित हेडमास्टर नहीं

कोडरमा जिले में करीब 674 सरकारी स्कूल संचालित हैं। हालांकि, इनमें किसी भी स्कूल में नियमित हेडमास्टर की नियुक्ति नहीं है। स्कूलों का संचालन प्रभारी हेडमास्टर के माध्यम से किया जा रहा है। प्रभारी व्यवस्था में शिक्षकों को पढ़ाई कराने के साथ स्कूल के प्रशासनिक काम भी संभालने पड़ते हैं। इसका असर शैक्षणिक गतिविधियों और कक्षा संचालन पर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी

जिले के सरकारी स्कूलों में करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इनके लिए विभिन्न स्कूलों में करीब साढ़े पांच हजार शिक्षक कार्यरत हैं। हालांकि, शिक्षकों की संख्या होने के बावजूद कई स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। विशेष रूप से गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बनी रहती है।

एक शिक्षक को संभालनी पड़ती हैं कई कक्षाएं और जिम्मेदारियां

कई स्कूलों में एक शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं या विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। ऐसे में विद्यार्थियों को प्रत्येक विषय पर पर्याप्त समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलना मुश्किल हो सकता है। कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान देने और बेहतर शैक्षणिक तैयारी में भी शिक्षकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें विभिन्न प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्य भी करने पड़ते हैं। इनमें चुनाव संबंधी कार्य, सरकारी सर्वे, विभागीय पोर्टल पर आंकड़े और रिपोर्ट अपलोड करने जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। इसके अलावा जनगणना और अन्य विभागीय कार्यों में भी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।

पीएम पोषण योजना की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर

स्कूलों में पीएम पोषण योजना के संचालन और उससे जुड़े रिकॉर्ड तथा रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को निभानी पड़ती है। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों में काफी समय चला जाता है। इसका सीधा असर बच्चों को पढ़ाने, कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान देने और शैक्षणिक गतिविधियों की तैयारी पर पड़ सकता है।

शिक्षक दिवस पर उठे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल

शिक्षक दिवस के अवसर पर कोडरमा की यह स्थिति सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। एक ओर शिक्षकों से विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है, वहीं दूसरी ओर उन्हें पढ़ाई के अलावा कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ती हैं। नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति और विषयवार शिक्षकों की कमी दूर होने पर स्कूलों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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