Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने 135.2 किलोग्राम गांजा तस्करी से जुड़े मामले में आरोपी रवींद्र कुमार सिंह उर्फ राजू को जमानत दे दी है। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद जमानत याचिका मंजूर की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री आरोपी को दोषी मानने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही, आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया है। अदालत ने आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया है। आरोपी 14 जनवरी 2026 से जेल में बंद था।
ओडिशा से झारखंड और बिहार में गांजा तस्करी का आरोप
मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), रांची में दर्ज क्राइम केस नंबर 01/NCB/रांची/2026 से जुड़ा है। इसके आधार पर NDPS केस नंबर 13/2026 के तहत कार्रवाई चल रही है। आरोपी पर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(सी), 20(बी)(ii)(सी) और 29 के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोप के मुताबिक, रवींद्र कुमार सिंह कथित तौर पर गांजा तस्करी करने वाले एक सिंडिकेट का सदस्य था। यह सिंडिकेट ओडिशा से झारखंड और बिहार में गांजे की तस्करी करता था। इस मामले में एनसीबी के अधिकारियों ने सह-आरोपी राजेश कुमार, दीपक कुमार प्रसाद और प्रफुल्ल कुमार पांडेय को 135.2 किलोग्राम गांजे के साथ पकड़ा था।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की कमी का दिया हवाला
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि रवींद्र कुमार सिंह को झूठे मामले में फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई आपराधिक पूर्व इतिहास नहीं है और मामले में आरोपपत्र भी दाखिल हो चुका है। हालांकि, अब तक किसी गवाह की गवाही नहीं हुई है। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपी को मामले से जोड़ने के लिए सह-आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान और गुप्त सूचना के अलावा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
एनसीबी ने भी स्वीकार की साक्ष्यों की कमी
सुनवाई के दौरान एनसीबी ने जमानत का विरोध किया। हालांकि, एजेंसी की ओर से यह भी स्वीकार किया गया कि सह-आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान और गुप्त सूचना के अतिरिक्त आरोपी को मामले से जोड़ने वाला कोई अन्य साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। साथ ही, गुप्त सूचना का स्रोत केस डायरी या दाखिल आरोपपत्र में दर्ज नहीं था। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और आरोपी के आपराधिक इतिहास नहीं होने को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट के आदेश के अनुसार, निर्धारित मुचलके और जमानतदारों की शर्तें पूरी करने के बाद आरोपी को रिहा किया जा सकेगा। जमानत मिलने का अर्थ मामले में दोषमुक्त होना नहीं है।






















