Samachar Post रिपोर्टर, देवघर : जिले के पालोजोरी प्रखंड स्थित डुमरिया गांव में संताली भाषा और ओलचिकी लिपि को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की गई है। गांव में करीब एक महीने से संताली ओलचिकी ट्यूशन चल रहा है, जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सभी रुचि लेकर भाषा और लिपि सीख रहे हैं। यह ट्यूशन आतु मोड़े होड़ के सहयोग से जय प्रकाश मुर्मू के घर में संचालित किया जा रहा है।
सप्ताह में दो दिन होती हैं कक्षाएं
इस ट्यूशन में फिलहाल करीब 25 छात्र-छात्राएं और ग्रामीण नियमित रूप से शामिल हो रहे हैं। डुमरिया के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी यहां नि:शुल्क ओलचिकी की शिक्षा ले सकते हैं। कक्षाएं सप्ताह में दो दिन बुधवार और रविवार को सुबह आयोजित की जाती हैं। ओलचिकी शिक्षक संजय टुडू विद्यार्थियों और ग्रामीणों को संताली भाषा और ओलचिकी लिपि की प्रारंभिक जानकारी दे रहे हैं।
नई पीढ़ी को भाषा और संस्कृति से जोड़ने की पहल
ग्रामीणों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति से जोड़ना है। उनका कहना है कि संताली भाषा के लिए एक लिपि के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के बीच भाषा और साहित्य का जुड़ाव मजबूत हो सकता है। ग्रामीणों ने ओलचिकी को व्यवस्थित लिपि बताते हुए कहा कि इसका यूनिकोड मानक उपलब्ध होने से डिजिटल माध्यमों में संताली भाषा के लेखन और प्रसार में भी सुविधा मिलती है। पंडित रघुनाथ मुर्मू ओलचिकी लिपि के रचयिता हैं और संताली भाषा के अध्ययन एवं साहित्य के विकास में इस लिपि के प्रचार-प्रसार को महत्वपूर्ण माना जाता है।
विद्यार्थियों के बीच पुस्तक और कैलेंडर बांटे गए
ओलचिकी सीखने वाले विद्यार्थियों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए पुस्तक और कैलेंडर का वितरण भी किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी पहल से बच्चों और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लिपि और संस्कृति से जोड़ने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में नरसिंह मरांडी, सुशिल मरांडी, हरीश टुडू, मनोज मुर्मू, जयदेव मरांडी, सावन टुडू, बजंती मुर्मू, अन्नू मुर्मू, पूजा मुर्मू, फूलकुमारी मुर्मू, अन्नू मरांडी, रितिका मुर्मू और विनीति मुर्मू समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।






















