Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा रद्द करने से जुड़े मामले में बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे निर्धारित की है। इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से मामले में काउंटर एफिडेविट भी प्रस्तुत किया जा चुका है। परीक्षा से जुड़े आरोपों की जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को मॉनिटर नियुक्त किया गया है, जबकि आईपीएस अधिकारी आर.के. मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने दाखिल किया जवाब
बुधवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जवाब दाखिल किया गया और उनकी बहस पूरी हुई। वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद लिफाफे में दो जांच रिपोर्ट भी पेश कीं। सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रही वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के पास रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध नहीं होने को लेकर भी चर्चा हुई। अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि तीन वर्षों में जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी और हाल के दिनों में इसमें अचानक तेजी कैसे आई।
JPSC जांच के दौरान सामने आया CGL कनेक्शन
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि JPSC भर्ती परीक्षा की जांच के दौरान JSSC-CGL से जुड़े कई तथ्य सामने आए। सरकार ने कहा कि जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आए जिनका कथित तौर पर परीक्षा अनियमितताओं से संबंध रहा है।सरकार का दावा है कि जांच के दौरान कई ऐसे स्थानों की जानकारी मिली, जहां अभ्यर्थियों को उत्तर याद करवाने की व्यवस्था की गई थी। कुछ मामलों का खुलासा हो चुका है, जबकि कई तथ्यों की जांच अभी भी जारी है। सरकार ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के बीच सही और गलत उम्मीदवारों की पहचान करना आसान नहीं है।
कैबिनेट के फैसले का भी किया गया उल्लेख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि जांच से जुड़े तथ्यों को कैबिनेट के समक्ष रखा गया था, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी हवाला दिया। अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजरें गुरुवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



















