Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत हजारीबाग में बड़ी संख्या में मतदाताओं तक नोटिस पहुंचाने की प्रक्रिया अब भी जारी है। जिले में संदिग्ध श्रेणी में चिह्नित 3,76,795 मतदाताओं को नोटिस देने का लक्ष्य 30 सितंबर तक पूरा नहीं हो सका। तय समय सीमा तक करीब 2.77 लाख मतदाताओं तक ही नोटिस पहुंच पाया, जबकि लगभग 99,795 मतदाता अब भी नोटिस का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में इन मतदाताओं के दावे-आपत्ति दर्ज कराने और जरूरी दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को तय समय में पूरा करना प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
ड्राफ्ट सूची में नाम को लेकर मतदाताओं की चिंता
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम को लेकर आपत्ति या विसंगति वाले कई मतदाता अब भी नोटिस की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नोटिस नहीं मिलने के कारण कुछ लोग अपने नाम और रिकॉर्ड की स्थिति जानने के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालयों का रुख कर रहे हैं। मतदाताओं के बीच यह सवाल भी है कि नोटिस मिलने के बाद दस्तावेज जमा करने और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के लिए उन्हें कितना समय मिलेगा।
BLO पर नोटिस से लेकर दस्तावेज अपलोड करने तक की जिम्मेदारी
SIR की प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर अतिरिक्त काम का दबाव है। बूथ के आकार के अनुसार एक BLO को करीब 100 से 150 तक नोटिस दिए जा रहे हैं। BLO को नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाने के साथ-साथ उनसे जरूरी फॉर्म भरवाने और प्राप्त दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी भी निभानी है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस तैयार होने के साथ उन्हें मतदाताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
पहले 4 सितंबर, फिर 15 और 30 सितंबर तक बढ़ी समय-सीमा
संदिग्ध श्रेणी में शामिल मतदाताओं को नोटिस देकर दावा और आपत्ति का अवसर देने के लिए पहले 4 सितंबर तक की समय-सीमा तय की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 15 सितंबर किया गया और फिर 30 सितंबर तक का समय दिया गया। इसके बावजूद तय लक्ष्य के मुकाबले करीब एक लाख नोटिस लंबित रह गए हैं। इससे अब आगे की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।
2003 की मतदाता सूची से मिलान के दौरान सामने आई विसंगतियां
SIR के दौरान वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड का 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया गया। इस दौरान नाम, उम्र या पिता के नाम में अंतर वाली प्रविष्टियों को जांच के दायरे में लिया गया। इसके अलावा 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल ऐसे लोगों के रिकॉर्ड की भी जांच की गई, जिनका अपने माता-पिता के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो सका। पहले भी हजारीबाग में SIR के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के रिकॉर्ड सामने आए थे, जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट या अन्य श्रेणियों के कारण प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके थे।

12 अक्टूबर तक भेजे जा सकते हैं नोटिस
उप जिला निर्वाचन पदाधिकारी वेदवंती कुमारी के अनुसार नोटिस भेजने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर तक नोटिस भेजे जा सकते हैं और नोटिस तैयार होते ही संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में लापरवाही नहीं बरती जा रही है और प्रशासन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किया जा रहा है। SIR से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों और प्रक्रिया संबंधी जानकारी के लिए जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई गई है।





















