सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए जज, केंद्र सरकार ने नियुक्तियों को दी मंजूरी

Rupa Kumari | June 1, 2026 | 11:53 AM IST

Samachar Post डेस्क, रांची: देश की सर्वोच्च अदालत को पांच नए न्यायाधीश मिल गए हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी देते हुए चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नियुक्तियों की जानकारी साझा की। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई थी। ऐसे में नई नियुक्तियों को न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वी. मोहना बनीं सुप्रीम कोर्ट की 12वीं महिला जज

नवनियुक्त न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वह देश की दूसरी महिला अधिवक्ता हैं जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इससे पहले यह सम्मान इंदु मल्होत्रा को मिला था। वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला न्यायाधीश होंगी। उनकी नियुक्ति को न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और प्रतिनिधित्व के रूप में भी देखा जा रहा है।

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कई महत्वपूर्ण मामलों में कर चुकी हैं पैरवी

तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली वी. मोहना ने वर्ष 1988 में कानून की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबा और उल्लेखनीय कानूनी करियर बनाया। उन्होंने कई चर्चित मामलों में पक्ष रखा है, जिनमें सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का मामला, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार से जुड़े विवाद और कर्नाटक हिजाब मामले जैसे महत्वपूर्ण केस शामिल हैं। कानूनी क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। वी. मोहना के अलावा चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को भी सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया है। इनमें शामिल हैं। शील नागू, एस. चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा, अरुण पल्ली इनमें जस्टिस एस. चंद्रशेखर का झारखंड से विशेष जुड़ाव रहा है। वह झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, इसलिए उनकी पदोन्नति को राज्य के न्यायिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कॉलेजियम की सिफारिश पर लगी मुहर

इन सभी नामों की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को भेजी थी। कॉलेजियम की सिफारिशों पर विचार करने के बाद सरकार ने नियुक्तियों को अंतिम मंजूरी दी। भारत में उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों और पदोन्नति के लिए कॉलेजियम प्रणाली के तहत ही नामों की सिफारिश की जाती है।

लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। बढ़ते न्यायिक कार्यभार और मामलों की संख्या को देखते हुए इन नियुक्तियों को अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट अपनी पूर्ण स्वीकृत क्षमता के और करीब पहुंच गया है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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