सारंडा जंगल में फिर IED विस्फोट: एक और हथिनी गंभीर रूप से घायल, तीन महीने में तीसरी घटना

Rupa Kumari | October 7, 2025 | 12:34 PM IST
  • पश्चिमी सिंहभूम में हथिनी IED विस्फोट की चपेट में

Samachar Post रिपोर्टर, पश्चिमी सिंहभूम : पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा स्थित सारंडा जंगल में एक बार फिर हाथियों को खतरा मंडरा रहा है। मनोहरपुर प्रखंड के बांधटोली गांव के पास, कंपार्टमेंट नंबर-36 में रविवार देर रात एक मादा हथिनी गंभीर रूप से घायल मिली। हथिनी लगभग 8–10 वर्ष की बताई जा रही है और उसके अगले दाहिने पैर में गहरा जख्म है, साथ ही सभी उंगलियां क्षतिग्रस्त हैं। वन विभाग का अनुमान है कि यह चोट माओवादियों द्वारा लगाए गए IED विस्फोट के कारण हुई है। यह घटना पिछले तीन महीनों में सारंडा जंगल में हाथियों के घायल या मारे जाने की तीसरी घटना है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों में गहरी चिंता है।

वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सोमवार सुबह प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. संजय घोलटकर के नेतृत्व में कर्मियों ने घायल हथिनी का इलाज शुरू किया। डॉ. घोलटकर ने बताया कि हथिनी को केले खिलाकर एंटीबायोटिक और सूजन कम करने की दवाएं दी गई हैं। डॉ. घोलटकर के अनुसार, जख्म लगभग 6–7 दिन पुराना है और किसी अत्यधिक प्रभाव से हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि IED विस्फोट की आशंका को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। फिलहाल हथिनी की स्थिति गंभीर है और वन विभाग उसकी लगातार निगरानी कर रहा है।

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तीन महीने में तीसरी घटना

सारंडा जंगल में हाल के तीन महीनों में यह तीसरी घटना है जिसमें हाथियों को गंभीर चोटें लगी हैं या उनकी मृत्यु हुई है:

  • 5 जुलाई 2025: एक घायल हाथी को ट्रेंक्युलाइज कर इलाज के लिए लाया गया, लेकिन 40 मिनट के भीतर उसकी मृत्यु हो गई।
  • 9 जुलाई 2025: एक अन्य हाथी इलाज शुरू होने के आधे घंटे में मर गया। इन दोनों घटनाओं में माओवादियों द्वारा लगाए गए IED को जिम्मेदार पाया गया था।

वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर चिंता

सारंडा जंगल भारत के सबसे घने जंगलों में से एक है और हाथियों का यह घर है। इन लगातार होने वाली घटनाओं ने न केवल वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को उजागर किया है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और माओवाद-प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वन विभाग ने हथिनी की देखभाल के लिए विशेष टीम गठित की है और जल्द ही इस क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए योजना घोषित की जाएगी।

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