Samachar Post रिपोर्टर, पाकुड़ : पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले के रायगंज स्थित एक पावरोटी फैक्ट्री से रेस्क्यू किए गए पाकुड़ के चार बच्चों को सोमवार को उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया। बच्चों से कथित तौर पर बाल मजदूरी कराए जाने की सूचना मिलने के बाद झारखंड प्रशासन और संबंधित संस्थाओं ने कार्रवाई की थी। दरअसल, रांची के एक एनजीओ को जानकारी मिली थी कि पश्चिम बंगाल के रायगंज क्षेत्र की कई फैक्ट्रियों में पाकुड़ और संथाल परगना के बच्चों से काम कराया जा रहा है। एनजीओ ने इसकी सूचना झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) को दी थी।
झालसा के निर्देश पर बनी जांच टीम
मामले की जानकारी मिलने के बाद झालसा ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर जांच करने और बच्चों को रेस्क्यू कराने का निर्देश दिया। इसके बाद पाकुड़ की उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने एक टीम गठित की। टीम में सिविल एसडीओ, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, श्रम अधीक्षक और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को शामिल किया गया। टीम पश्चिम बंगाल के रायगंज पहुंची और वहां बच्चों से काम कराए जाने की जानकारी जुटाई। इसके बाद रायगंज में काम करने वाली एक स्थानीय एनजीओ की मदद से पिछले महीने पावरोटी फैक्ट्री से पाकुड़ के चार बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
रायगंज से पाकुड़ लाए गए बच्चे
रेस्क्यू के बाद बच्चों को पश्चिम बंगाल की संबंधित संस्था की देखरेख में रखा गया था। इसके बाद उन्हें पाकुड़ लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को चारों बच्चों को रायगंज से पाकुड़ लाया गया। बाल कल्याण कार्यालय में बच्चों के अभिभावकों को बुलाया गया। जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सभी चार बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी व्यास ठाकुर, बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद प्रमाणिक, सलमा जहां, रंजना श्रीवास्तव और सूर्योदय चिल्ड्रन होम रायगंज के देवशीष कर मौजूद रहे।
बच्चों को सुरक्षित वापस लाने में प्रशासन की भूमिका
बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद प्रमाणिक ने बताया कि रांची के एक एनजीओ ने झालसा को रायगंज में बच्चों से काम कराए जाने की सूचना दी थी। इसके बाद झालसा के निर्देश पर जिला प्रशासन ने टीम गठित की। उन्होंने बताया कि टीम के प्रयासों और पश्चिम बंगाल की स्थानीय संस्था के सहयोग से चार बच्चों को रेस्क्यू किया गया। जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया।


















