Samachar Post रिपोर्टर, रांची : आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर मीडिया पैनलिस्ट डॉ. राजीव नारायण प्रसाद ने केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप रही है। डॉ. प्रसाद ने बैंक की बिक्री से रोजगार, आर्थिक असमानता और ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
आईडीबीआई बैंक की स्थापना के उद्देश्य का दिया हवाला
डॉ. राजीव नारायण प्रसाद ने कहा कि आईडीबीआई बैंक की स्थापना 1 जुलाई 1964 को औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और औद्योगिक इकाइयों को दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इसे सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों के निजीकरण की नीति से जोड़ा। उन्होंने प्रस्तावित सौदे की कीमत करीब 52,878 करोड़ रुपये बताए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इस फैसले के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
निजीकरण से रोजगार और आम लोगों पर असर की आशंका
डॉ. प्रसाद ने आशंका जताई कि निजीकरण से रोजगार के अवसरों में कमी, नौकरी की असुरक्षा और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, इसका असर कमजोर आर्थिक वर्गों और आम लोगों पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के संभावित लाभों के साथ उसके जोखिमों पर भी चर्चा होनी चाहिए। सरकार को सार्वजनिक संस्थानों को बेचने के बजाय उनकी कार्यक्षमता और वित्तीय स्थिति बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
बैंक की बिक्री और ग्राहकों की जमा राशि पर जताई चिंता
डॉ. प्रसाद ने कनाडा के फेयरफैक्स समूह से जुड़ी कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता और लेखा-जोखा से संबंधित कथित आरोपों का उल्लेख करते हुए बैंक की बिक्री से पहले सभी पहलुओं की जांच की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बैंक ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। डॉ. प्रसाद ने कहा कि जमा बीमा के तहत पात्र जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सुरक्षा मिलती है। ऐसे में बैंक के स्वामित्व में बदलाव के दौरान ग्राहकों को जमा राशि की सुरक्षा से जुड़े नियमों और जोखिमों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
निजीकरण पर रोक लगाने की मांग
डॉ. राजीव नारायण प्रसाद ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने सरकारी संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा देने की मांग भी की। उनके बयान में आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर निजीकरण, रोजगार और जमाकर्ताओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल प्रमुख रहे।






















