Samachar Post रिपोर्टर,गिरिडीह : उसरी नदी से पाइपलाइन के जरिए बालमुकुंद फैक्ट्री को पानी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव के विरोध में रविवार को गिरिडीह में बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतरे। ग्रामीणों ने कई किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया और सरकार व प्रशासन से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। इस आंदोलन में बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग लोग भी शामिल हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने उसरी नदी को बचाने की अपील की।
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ग्रामीणों ने बताया नदी को जीवनरेखा
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उसरी नदी इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। नदी का पानी आसपास के गांवों में पेयजल, खेती और पशुपालन की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि निजी फैक्ट्री को नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया गया तो भविष्य में नदी के जलस्तर पर इसका असर पड़ सकता है। इससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का विरोध
मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन स्वीकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और जीवन से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे बचाना पूरे क्षेत्र के हित में जरूरी है।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि बालमुकुंद फैक्ट्री को उसरी नदी का पानी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को तत्काल रद्द किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से बड़े जन आंदोलन की बात कही। ग्रामीणों ने कहा कि उसरी नदी को बचाने की यह लड़ाई केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है।


















