हजारीबाग वन भूमि मामले में ED-CBI जांच से हाईकोर्ट का इनकार, जनहित याचिका खारिज

Rupa Kumari | July 8, 2026 | 01:21 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग में कथित वन भूमि की अवैध बिक्री और कब्जे के मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी मामले की जांच  सीबीआई और ईडी को सौंपने का आदेश नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न हों। मुख्य न्यायाधीशएमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए अधिकांश आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित नहीं होते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता की विश्वसनीयता को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों को मामले की जांच सौंपना न्यायसंगत नहीं होगा।

450 एकड़ वन भूमि के अवैध हस्तांतरण का दावा साबित नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर यह भी सामने आया कि 450 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण का दावा जांच में प्रमाणित नहीं हो सका। इसके अलावा वन विभाग के अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोपों के समर्थन में भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

पहले से चल रही थी विभागीय जांच

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वन विभाग और अन्य संबंधित प्राधिकरण इस जनहित याचिका के दायर होने से पहले ही कथित अतिक्रमण और वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे। अदालत ने माना कि जहां-जहां अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, वहां संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई भी शुरू की गई है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि जिन बिक्री विलेखों का याचिका में उल्लेख किया गया था, उनमें वन विभाग द्वारा किसी प्रकार की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किए जाने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस आदेश को किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए “क्लीन चिट” नहीं माना जाना चाहिए।

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लंबित मामलों में जारी रहेगी कानूनी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले में जांच, विभागीय कार्रवाई या कानूनी प्रक्रिया पहले से लंबित है, तो वह कानून के अनुसार आगे भी जारी रहेगी। अंत में अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर टिप्पणियां करते हुए जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि वन भूमि से जुड़े सभी आरोप पूरी तरह समाप्त हो गए हैं। अदालत ने केवल यह कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फिलहाल सीबीआई और ईडी जांच का आदेश देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। यदि भविष्य में नए तथ्य या साक्ष्य सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियां और विभाग कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

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