Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सरकार ने करीब 8 से 10 साल पहले नीलाम की गई पांच खदानों का लीज आवंटन रद्द कर दिया है। इनमें दो गोल्ड ब्लॉक, एक आयरन ओर ब्लॉक और दो ग्रेफाइट ब्लॉक शामिल हैं। जरूरी मंजूरियां, खासकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण इन खदानों में अब तक खनन उत्पादन शुरू नहीं हो सका था। राज्य सरकार ने अब इन खदानों की दोबारा नीलामी कराने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबंधित विभाग को प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। पहली बार इन खदानों की नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित MSTC के ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के जरिए हुई थी। अब इसी प्लेटफॉर्म पर लीज आवंटन रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी की गई है। खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई है।
परासी गोल्ड माइंस का 2017 में हुआ था आवंटन
69.240 हेक्टेयर में फैली परासी गोल्ड माइंस की नीलामी 1 नवंबर 2017 को हुई थी। इसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था। कंपनी को 2 जनवरी 2021 तक खदान से उत्पादन शुरू करना था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी उत्पादन शुरू नहीं हो सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण खनन कार्य शुरू नहीं हो पाया। लंबे समय तक उत्पादन शुरू नहीं होने के बाद राज्य सरकार ने इसका लीज आवंटन रद्द कर दिया। पश्चिमी सिंहभूम जिले में 272.651 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक की नीलामी 26 अक्टूबर 2016 को हुई थी। इसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था। निर्धारित समय के भीतर यहां भी खनन कार्य शुरू नहीं हो सका। फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत जरूरी मंजूरियां नहीं मिलने को परियोजना में देरी की वजह बताया गया है।

सारंडा वन क्षेत्र में भनगांव आयरन ओर ब्लॉक
भनगांव आयरन ओर ब्लॉक पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र में स्थित है और सारंडा वन प्रभाग के अंतर्गत आता है। वर्ष 2018 में झारखंड सरकार की ई-नीलामी के जरिए यह ब्लॉक साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को आवंटित किया गया था। बताया गया है कि इस ब्लॉक के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अन्य जरूरी एनओसी नहीं मिल सकी। इसके चलते खनन उत्पादन शुरू नहीं हुआ। अब राज्य सरकार ने इस ब्लॉक का लीज आवंटन भी रद्द कर दिया है।
यह भी पढ़ें : जमशेदपुर में ट्रेलर की चपेट में आने से बाइक सवार की मौत, 50 मीटर तक घसीटता ले गया वाहन
कंपनियां माइनिंग ट्रिब्यूनल में दे सकती हैं चुनौती
लीज आवंटन रद्द किए जाने के बाद संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने फैसले को माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की बात कही है। कंपनियों का पक्ष है कि खनन शुरू होने में देरी के लिए वे जिम्मेदार नहीं थीं। कंपनियों के मुताबिक, सरकारी प्रक्रियाओं में देरी, जरूरी एनओसी और फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। हालांकि, फिलहाल राज्य सरकार ने पांचों खदानों का लीज आवंटन रद्द कर दिया है और इन्हें दोबारा नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।















