ISRO को कमजोर क्यों कर रही मोदी सरकार? जयराम रमेश ने उठाए निजीकरण पर सवाल

Rupa Kumari | August 24, 2026 | 02:03 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची : कांग्रेस ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भविष्य की भूमिका को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता और प्रवक्ता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण की कथित बढ़ती भूमिका पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या सरकार ISRO की भूमिका को सीमित कर रही है। जयराम रमेश ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अंतरिक्ष कार्यक्रमों में ISRO की भूमिका और उसके भविष्य को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यूआर राव और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों के योगदान से ISRO ने अपनी तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता विकसित की है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण को लेकर कांग्रेस का आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार परमाणु ऊर्जा की तरह अंतरिक्ष क्षेत्र में भी आक्रामक निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि रॉकेट तकनीक के विकास और निर्माण में ISRO की भूमिका को सीमित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उपग्रहों से जुड़े ISRO के कई एसेट्स निजी कंपनियों को सौंपे जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

तमिलनाडु के स्पेसपोर्ट पर भी सवाल

कांग्रेस नेता ने तमिलनाडु में निर्माणाधीन दूसरे स्पेसपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना में ISRO करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी इसे एक निजी कंपनी को सौंपने की योजना की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसा होता है, तो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित ऐतिहासिक स्पेसपोर्ट की भविष्य में क्या भूमिका रह जाएगी।

ISRO को कमजोर करने की जरूरत क्यों?

जयराम रमेश ने कहा कि देश में स्पेस स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना जरूरी है और निजी क्षेत्र की भागीदारी का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ ISRO की संस्थागत क्षमता और विशेषज्ञता को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस संगठन ने भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई, उसकी भूमिका को सीमित करने की जरूरत आखिर क्यों महसूस की जा रही है।

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वैज्ञानिकों के पलायन का भी मुद्दा उठाया

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में ISRO के करीब 100 से 120 प्रमुख पेशेवरों के नौकरी छोड़ने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के इस तरह बाहर जाने की स्थिति संगठन की कार्यक्षमता और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। जयराम रमेश ने एक पूर्व ISRO अध्यक्ष की ओर से निजीकरण की मौजूदा दिशा पर जताई गई कथित चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और निजी भागीदारी के साथ-साथ ISRO की स्वायत्तता, विशेषज्ञता और संस्थागत क्षमता की भी पूरी तरह रक्षा करनी चाहिए। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण की नीति और ISRO की भविष्य की भूमिका को लेकर स्पष्टता देने की मांग की है।

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