हजारीबाग के सरकारी स्कूलों में 3 लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा दांव पर, कई स्कूलों में तड़ित चालक नहीं

Meenu | August 25, 2026 | 01:15 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले तीन लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सरकारी स्कूलों में लगाए गए तड़ित चालकों की मौजूदा स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। कई विद्यालयों में तड़ित चालक लगे ही नहीं हैं, जबकि कुछ स्कूलों में लगे उपकरण चोरी हो चुके हैं या रखरखाव के अभाव में खराब पड़े हैं। वर्ष 2011 में जिले के 1,485 सरकारी प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में तड़ित चालक लगाने की योजना शुरू की गई थी। प्रत्येक तड़ित चालक के लिए करीब 36 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद कई साल बाद भी उपकरणों की स्थिति को लेकर विभागीय दावे और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है।

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2011 से 2013 के बीच लगाए गए थे तड़ित चालक

आकाशीय बिजली से होने वाली घटनाओं में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2006-07 में सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक लगाने का निर्णय लिया था। हजारीबाग में इस योजना पर वर्ष 2011 से काम शुरू हुआ और 2011, 2012 तथा 2013 के दौरान स्कूलों में तड़ित चालक लगाने का काम किया गया। उस समय जिले के 1,485 सरकारी स्कूलों को योजना के दायरे में रखा गया था। प्रत्येक स्कूल में तड़ित चालक लगाने के लिए करीब 36 हजार रुपये निर्धारित किए गए थे। इस हिसाब से योजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे।

कई स्कूलों में तड़ित चालक नहीं होने का दावा

शिक्षा विभाग का दावा है कि योजना के तहत सभी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे। हालांकि, कई विद्यालयों में जांच के दौरान इनके नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। शहर के दीपूगढ़ा स्थित नव प्राथमिक विद्यालय मरियम टोली में तड़ित चालक नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं, कटकमदाग क्षेत्र के मध्य विद्यालय सुल्ताना में भी उपकरण नहीं होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि शहर के कुछ ही स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे। इनमें मुख्य रूप से बहुमंजिला भवन वाले विद्यालय शामिल थे। ऐसे स्कूलों की संख्या करीब चार-पांच बताई जा रही है। इससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

चोरी और रखरखाव के अभाव में बेकार हुए उपकरण

शिक्षा विभाग के जूनियर इंजीनियर कालेश्वर महतो के अनुसार, योजना के तहत सभी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे। उनके मुताबिक, बाद में कई विद्यालयों से उपकरण चोरी हो गए, जबकि बचे हुए कई उपकरण रखरखाव के अभाव में खराब हो चुके हैं। अगर विभाग के इस दावे को सही माना जाए तो भी सवाल उठता है कि इतने महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और मरम्मत की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बरसात के मौसम में तड़ित चालक की उपयोगिता सबसे अधिक होती है। ऐसे में वर्षों से खराब पड़े उपकरणों को दुरुस्त नहीं कराया जाना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

तीन लाख से अधिक बच्चों की सुरक्षा का सवाल

हजारीबाग के सरकारी स्कूलों में तीन लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें बड़ी संख्या प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के बच्चों की है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूल खुले और ऊंचे स्थानों पर स्थित हैं, जहां बारिश और गरज-चमक के दौरान आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहता है। जिले में वज्रपात की घटनाएं भी चिंता बढ़ा रही हैं। इस वर्ष पिछले तीन महीनों में जिले में आकाशीय बिजली गिरने से सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। 7 अगस्त को कटकमसांडी के कंचनपुर गांव में खेत में काम कर रहे एक दंपती की भी वज्रपात की चपेट में आने से मौत हुई थी। ऐसे में स्कूलों में लगे तड़ित चालकों की स्थिति की नियमित जांच और खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत जरूरी हो जाती है।

कैसे काम करता है तड़ित चालक?

तड़ित चालक का उद्देश्य आकाशीय बिजली को भवन की संरचना से सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाना है। आमतौर पर भवन की छत के ऊपरी हिस्से में धातु की एक नुकीली छड़ लगाई जाती है। इसे मोटे चालक तार के माध्यम से जमीन में बनी अर्थिंग व्यवस्था से जोड़ा जाता है। आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में विद्युत धारा को भवन के बजाय इसी चालक के माध्यम से सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाया जाता है। इससे भवन और उसके आसपास मौजूद लोगों को नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है।

विभाग ने जांच कराने का दिया भरोसा

जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार ने कहा कि सभी सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक लगाए गए थे। उन्होंने माना कि कुछ स्कूलों में उपकरण चोरी होने और कुछ जगहों पर खराब होने की जानकारी है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में तड़ित चालक नहीं हैं, वहां इसे लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किन स्कूलों में तड़ित चालक मौजूद नहीं हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजना के तहत लगाए गए इन सुरक्षा उपकरणों की मौजूदा स्थिति का व्यापक सर्वे कब होगा और कितने स्कूलों में तड़ित चालक वास्तव में काम कर रहे हैं। बर

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