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हजारीबाग में 3.5 लाख आबादी के लिए सिर्फ 3 फागिंग मशीन, बारिश में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप

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Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : बारिश के साथ हजारीबाग शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र के 36 वार्डों में करीब 3.5 लाख की आबादी रहती है, लेकिन मच्छर नियंत्रण के लिए निगम के पास फिलहाल सिर्फ तीन फागिंग मशीनें हैं। ऐसे में सभी वार्डों में नियमित फागिंग कराना चुनौती बना हुआ है। शहरवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में लंबे अंतराल के बाद फागिंग होती है, जबकि बारिश के बाद डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

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वीआईपी इलाकों में ज्यादा फागिंग का आरोप

शहरवासियों का कहना है कि मच्छररोधी अभियान पूरे शहर में जरूरत के अनुसार चलाया जाना चाहिए। आरोप है कि फागिंग का अधिक लाभ प्रमुख और वीआईपी इलाकों को मिलता है, जबकि घनी आबादी वाले मोहल्लों में नियमित अभियान नहीं चल पाता। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।

नई मशीन खरीदने का प्रस्ताव, अब तक खरीद नहीं

मौजूदा संसाधनों की कमी को देखते हुए नगर निगम बोर्ड की बैठकों में नई फागिंग मशीनें खरीदने का प्रस्ताव कई बार रखा जा चुका है। इसके बावजूद अब तक मशीनों की खरीद नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शहर की आबादी और जरूरत को देखते हुए फागिंग मशीनों की संख्या बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है।

जलजमाव और कचरे से बढ़ रहा मच्छरों का प्रकोप

बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलजमाव की समस्या बनी रहती है। खुली नालियां, गंदगी और जगह-जगह जमा कचरा मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। कई इलाकों में बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहने से स्थिति और खराब हो रही है। लोगों का कहना है कि सिर्फ फागिंग से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जलजमाव की निकासी, नालियों की नियमित सफाई और कीटनाशक का छिड़काव भी जरूरी है।

सरकारी अस्पतालों में 38 मरीज मिलने का दावा

मच्छरजनित बीमारियों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले करीब दो महीने में सरकारी अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया समेत मच्छरजनित बीमारियों के करीब 38 मरीज मिले हैं। निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को जोड़ने पर यह संख्या 200 से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, निजी अस्पतालों से जुड़े इन आंकड़ों का आधिकारिक सत्यापन होना बाकी है।

जागरूकता रैली निकली, जमीनी कार्रवाई पर सवाल

विश्व मच्छर दिवस के मौके पर जिला वेक्टर जनित रोग कार्यालय की ओर से जागरूकता रैली निकालकर लोगों को मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। हालांकि, शहरवासियों का कहना है कि जागरूकता के साथ मच्छर नियंत्रण के लिए जमीनी स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

तीन मशीनों से 36 वार्डों में कितना प्रभावी अभियान?

36 वार्ड और करीब 3.5 लाख की आबादी के मुकाबले तीन फागिंग मशीनों की संख्या कम होने से नियमित मच्छर नियंत्रण अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि मच्छर प्रभावित और संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर वहां नियमित फागिंग कराई जाए। साथ ही जलजमाव हटाने और नालियों की सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

बीमारी फैलने से पहले रोकथाम जरूरी

बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ नगर निगम के सामने चुनौती सिर्फ फागिंग तक सीमित नहीं है। जलजमाव, कचरा और गंदगी पर नियंत्रण के साथ नियमित फागिंग जरूरी है, ताकि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने से पहले प्रभावी रोकथाम की जा सके।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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