Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों की खरीद के बाद उनके इस्तेमाल नहीं होने का एक और मामला सामने आया है। हजारीबाग ब्लड बैंक के लिए खरीदी गईं कई महत्वपूर्ण मशीनें करीब तीन वर्षों से पैक पड़ी हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने के कारण कुछ उपकरणों पर जंग का असर भी दिखाई देने लगा है। ब्लड बैंक के लिए खरीदे गए इन महंगे उपकरणों का उद्देश्य मरीजों के लिए रक्त के सुरक्षित भंडारण और जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन संचालन की व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण उपकरण स्टोर में ही पड़े हैं। इससे सरकारी निवेश के साथ-साथ मरीजों को मिलने वाली संभावित स्वास्थ्य सुविधा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ब्लड स्टोरेज फ्रिज से एलिजा मशीन तक पैक
हजारीबाग ब्लड बैंक में रक्त के सुरक्षित भंडारण और जांच से जुड़े कई उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें दो डीप ब्लड स्टोरेज फ्रिज, एक डोमेस्टिक फ्रिज, दो डोनर कनेक्शन बेड और एलिजा मशीन का पूरा सेट शामिल बताया जा रहा है। ये उपकरण लंबे समय से पैक अवस्था में रखे हुए हैं। लगातार इस्तेमाल नहीं होने से इनकी उपयोगिता प्रभावित हो रही है। महंगी मशीनें यदि लंबे समय तक बंद और पैक अवस्था में पड़ी रहें तो उनके खराब होने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ब्लड बैंक के लिए इन उपकरणों की जरूरत थी, तो खरीद के बाद इनके संचालन के लिए जरूरी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
रेडक्रॉस से मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तक पहुंचा संचालन
हजारीबाग में ब्लड बैंक की शुरुआत रेडक्रॉस की पहल पर हुई थी। वर्ष 2004 से 2022 तक करीब 18 वर्षों तक रेडक्रॉस ने इसका संचालन किया। इस दौरान जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने के साथ आपात स्थिति में भी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बड़े हादसों और दुर्घटनाओं के समय रक्त की जरूरत पूरी करने के लिए रेडक्रॉस की ओर से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते थे। थैलेसीमिया मरीजों के लिए नियमित रक्त उपलब्ध कराने में भी संस्था की भूमिका बताई जाती है। बाद में ब्लड बैंक का संचालन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अधीन आ गया। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव हुआ और इसी अवधि में खरीदी गई कई मशीनें इस्तेमाल में आने के बजाय स्टोर में पड़ी रह गईं।
लाइसेंस के लिए डॉक्टर और तकनीकी कर्मियों की जरूरत
ब्लड बैंक के संचालन में मशीनों के अलावा चिकित्सक और तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ब्लड बैंक के सेक्रेटरी तनवीर सिंह के अनुसार, मशीनों का इस्तेमाल शुरू करने के लिए ब्लड बैंक का विधिवत संचालन और लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष पहले उपायुक्त स्तर से सिविल सर्जन को डॉक्टर और तकनीशियन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। हालांकि, आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हो सका। इसके चलते लाइसेंस की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई।
मरीजों को कब मिलेगा इन मशीनों का लाभ?
एक तरफ सरकारी अस्पतालों में मरीजों को लगातार रक्त की जरूरत पड़ती है, वहीं दूसरी ओर ब्लड बैंक के लिए खरीदे गए महंगे उपकरण वर्षों से इस्तेमाल का इंतजार कर रहे हैं। थैलेसीमिया मरीजों और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित रक्त भंडारण की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में जरूरत है कि संबंधित विभाग उपकरणों की वर्तमान स्थिति की जांच कराए, जरूरी डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था करे और लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी कर ब्लड बैंक को पूरी क्षमता के साथ शुरू करे। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मरीजों की सुविधा के लिए खरीदे गए महंगे उपकरण खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है और सरकारी धन का अपेक्षित लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पाएगा।






















