Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : चौपारण प्रखंड की सिंघरावां पंचायत में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यहां महज एक दिन में 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में तत्कालीन पंचायत सचिव की लॉगिन ID और प्रज्ञा केंद्र संचालक की कथित मिलीभगत से अनियमित तरीके से प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन ने सभी 92 जन्म प्रमाण पत्र तत्काल निरस्त कर दिए हैं। मामले में चौपारण BDO नितेश भास्कर के आवेदन पर तत्कालीन पंचायत सचिव अनुरागिनी प्रिया और प्रज्ञा केंद्र संचालक नौशाद असगर के खिलाफ चौपारण थाने में कांड संख्या 258/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
तबादले के बाद भी पंचायत सचिव की ID से जारी हुए प्रमाण पत्र
जांच में सामने आया कि अनुरागिनी प्रिया का चौपारण से डाडी प्रखंड तबादला हो चुका था। उन्हें 17 सितंबर को चौपारण से विरमित कर दिया गया था। इसके बाद 22 सितंबर को नए पंचायत सचिव केदार साव ने प्रभार ग्रहण कर लिया। इसके बावजूद 23 सितंबर को तत्कालीन पंचायत सचिव की लॉगिन ID का इस्तेमाल कर एक ही दिन में 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। प्रशासन को इसकी जानकारी 25 सितंबर को मिली। एक ही पंचायत से इतनी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र जारी होने के बाद जांच शुरू की गई, जिसमें अनियमितता का खुलासा हुआ।
डिजिटल सिग्नेचर और OTP से हुआ पूरा खेल
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, तत्कालीन पंचायत सचिव ने अपना डिजिटल सिग्नेचर और प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान मिलने वाला OTP प्रज्ञा केंद्र संचालक को उपलब्ध कराया था। आरोप है कि इसी के आधार पर संचालक ने निर्धारित दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी किए बिना जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए। जांच में यह भी सामने आया कि जारी किए गए 92 प्रमाण पत्र प्रज्ञा केंद्र संचालक के गांव केवला के लोगों के नाम पर थे। इससे जांच एजेंसियों को प्रमाण पत्र जारी करने में पूर्व नियोजित तरीके से अनियमितता किए जाने की आशंका है।
न आवेदन की जांच हुई, न जरूरी अनुशंसा
नियम के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र जारी करने से पहले आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसमें आंगनबाड़ी सेविका, वार्ड सदस्य, मुखिया और पंचायत सचिव के हस्ताक्षर समेत अन्य आवश्यक कागजात शामिल होते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन आगे बढ़ता है और सक्षम स्तर से अनुशंसा के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। प्रारंभिक जांच में सिंघरावां पंचायत में जारी किए गए 92 प्रमाण पत्रों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
SIR में इस्तेमाल की आशंका, जांच जारी
प्रशासनिक जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में किया जा सकता था। SIR के दौरान दस्तावेजों की जरूरत बढ़ने के बीच एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने को जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, इन प्रमाण पत्रों में से किसी का SIR में वास्तव में इस्तेमाल हुआ या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। यह स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन पंचायत सचिव अनुरागिनी प्रिया के खिलाफ पहले भी प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं। उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर प्रपत्र ‘क’ भी गठित किया गया था। हाल ही में उनका चौपारण से डाडी प्रखंड तबादला किया गया था।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच शुरू
चौपारण थाना प्रभारी पंकज कुमार के अनुसार, BDO के आवेदन के आधार पर कांड संख्या 258/26 दर्ज किया गया है। पुलिस तत्कालीन पंचायत सचिव और प्रज्ञा केंद्र संचालक की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। BDO नितेश भास्कर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में विरमित पंचायत सचिव की लॉगिन ID के दुरुपयोग से 92 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है। सभी प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए हैं और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।






















