Samachar Post रिपोर्टर, हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) में सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से मातृ वंदना शक्ति सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर IRS अधिकारी निशा उरांव शामिल हुईं। सम्मेलन में नारी सशक्तिकरण, आदिवासी समाज की पहचान, सामाजिक एकजुटता और जनजातीय समाज की मजबूती जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के बाद निशा उरांव ने कहा कि किसी भी मजबूत समाज के लिए महिलाओं का सशक्त होना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से अपनी क्षमता और अधिकारों को पहचानने की अपील की।
‘नारी कमजोर नहीं, शक्ति का स्वरूप है’
निशा उरांव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। महिलाओं को अपनी क्षमता, अधिकार और शक्ति को पहचानना होगा। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला अपने सामर्थ्य को पहचानती है, तो वह केवल अपने परिवार को ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी मजबूत बनाने में योगदान देती है।
‘आदिवासी को वनवासी कहना उचित नहीं’
सम्मेलन के बाद बातचीत में आदिवासी समाज की पहचान से जुड़े सवाल पर भी निशा उरांव ने अपनी बात रखी। उन्होंने ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आदिवासी समाज की अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को किसी दूसरे संबोधन से परिभाषित करने के बजाय उसकी अपनी पहचान और विरासत को समझना जरूरी है। धर्मांतरण के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की और बातचीत के दौरान ‘वेटिकनवासी’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस विषय पर आदिवासी समाज में गंभीर चर्चा और विचार की जरूरत बताई।
शिक्षा और एकजुटता से मजबूत होगा जनजातीय समाज
जब उनसे पूछा गया कि उरांव समाज की तरह अन्य जनजातीय समाजों को सामाजिक रूप से मजबूत करने के लिए क्या किया जाना चाहिए, तो उन्होंने शिक्षा, सामाजिक एकजुटता, संस्कृति के प्रति जागरूकता और युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लोगों में जागरूकता के साथ-साथ योजनाओं का सही क्रियान्वयन भी जरूरी है।
‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ जैसे वायरल नारों पर भी बोलीं
सोशल मीडिया पर महिलाओं से जुड़े कुछ नारों और वीडियो की चर्चा के बीच निशा उरांव से ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ जैसे वायरल नारों को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने पुरुष और महिला के रिश्ते को एक-दूसरे का पूरक बताया। सनातन परंपरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि धन के लिए मां लक्ष्मी, विद्या के लिए मां सरस्वती और शक्ति के लिए मां दुर्गा की आराधना की जाती है। उन्होंने सवाल किया कि जब नारी को धन, विद्या और शक्ति के स्वरूप के तौर पर स्वीकार किया गया है, तो फिर महिलाओं को खुद को कमजोर या अकेला क्यों मानना चाहिए।

सम्मेलन में नारी शक्ति और आदिवासी पहचान पर चर्चा
VBU में आयोजित मातृ वंदना शक्ति सम्मेलन में नारी सशक्तिकरण के साथ आदिवासी समाज की पहचान, सामाजिक चेतना और जनजातीय समाज की मजबूती जैसे विषय प्रमुख रहे। कार्यक्रम के बाद IRS निशा उरांव ने इन मुद्दों पर अपनी राय साझा की।





















