Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नियुक्ति से संबंधित नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली। मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
केंद्र ने नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि झारखंड में DGP की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं हुई। केंद्र का कहना था कि DGP की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक UPSC की ओर से तैयार किए गए पैनल में शामिल अधिकारियों में से चयन करना चाहिए था। केंद्र ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने इसके बजाय DGP नियुक्ति को लेकर नई नियमावली तैयार की, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है। केंद्र की ओर से यह भी दलील दी गई कि DGP पद पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारी की सेवा में कम से कम दो साल का कार्यकाल शेष होना चाहिए।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर क्या है विवाद?
तदाशा मिश्रा को झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को राज्य का DGP नियुक्त किया था। नियुक्ति के समय उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति में महज एक दिन बाकी था। उन्हें 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होना था। इससे एक दिन पहले यानी 29 दिसंबर 2025 को झारखंड सरकार ने DGP नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया था। संशोधन के जरिए DGP पद के लिए अधिकारी की कम से कम छह महीने की शेष सेवा की अनिवार्यता को हटा दिया गया था। इसके अगले ही दिन तदाशा मिश्रा को DGP नियुक्त किया गया। इसी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।
9 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
गुरुवार की सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए 9 अक्टूबर को फिर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। मामले में अब अगली सुनवाई के दौरान DGP नियुक्ति की नियमावली, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों और तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े पक्षों पर अदालत में आगे सुनवाई होगी।


















