Samachar Post रिपोर्टर,गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड स्थित मंझिलाडीह गांव से सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने आई है। यहां आदिवासी समुदाय के देवा सोरेन आज भी एक जर्जर मिट्टी के घर में रहने को मजबूर हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच उनका घर कभी भी ढह सकता है, लेकिन अब तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
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बारिश में जान जोखिम में डालकर रह रहे देवा सोरेन
लगातार बारिश के कारण देवा सोरेन का मिट्टी का घर पूरी तरह कमजोर हो चुका है। घर की दीवारें और छत कभी भी गिर सकती हैं, लेकिन मजबूरी में वह उसी घर में रह रहे हैं। बताया जाता है कि उनके पास न गैस चूल्हा है, न बिस्तर और न ही जीवनयापन के पर्याप्त संसाधन। केवल दो जोड़ी कपड़ों के सहारे गुजर-बसर कर रहे देवा सोरेन बारिश के दिनों में मिट्टी के फर्श पर ही रात बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, देवा सोरेन की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। इसके बाद से वह अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परिवार का सहारा न होने और आर्थिक तंगी के कारण उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
आवास योजना की सूची में भी नहीं है नाम
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि देवा सोरेन को अब तक किसी सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनका नाम लाभुकों की सूची में भी शामिल नहीं है। पंचायत समिति सदस्य मनोज सोरेन ने बताया कि देवा सोरेन लंबे समय से आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों और आदिवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाने का दावा करती है, लेकिन जरूरतमंद लोगों तक उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

व्यवस्था पर उठे सवाल
मनोज सोरेन ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी यदि एक गरीब आदिवासी सुरक्षित आवास, भोजन और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब सरकार आदिवासी समाज के विकास और कल्याण की बात करती है, तो सबसे कमजोर वर्ग तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचना चाहिए।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
देवा सोरेन की स्थिति ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को जल्द सर्वे कर उन्हें आवास योजना सहित अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाना चाहिए, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके। देवा सोरेन की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों जरूरतमंद परिवारों की तस्वीर है, जो आज भी सरकारी योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं।

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