Samachar Post डेस्क, रांची : सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से लिखित अनुमति मांगी है। इसके लिए उन्होंने 24 सितंबर 2026 को अटॉर्नी जनरल को पत्र भेजा। पत्र में Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15(1)(b) और धारा 2(c) का हवाला दिया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल अवमानना का कोई मामला शुरू नहीं हुआ है। अभी अटॉर्नी जनरल की सहमति मांगी गई है। सुप्रीम कोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की आपराधिक अवमानना कार्यवाही के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिखित सहमति आवश्यक होती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की कथित अवहेलना का आरोप
ब्रजेश सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुरूप बहु-सदस्यीय व्यवस्था का पालन नहीं किया गया। उन्होंने विशेष रूप से T.N. Seshan v. Union of India और Anoop Baranwal v. Union of India मामलों का उल्लेख किया है। उनका दावा है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच निर्णय लेने की संवैधानिक व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए और आयोग के फैसले संस्थागत रूप से लिए जाने चाहिए। यह आरोप अभी न्यायिक रूप से तय नहीं हुआ है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद उठा मामला
अधिवक्ता की यह पहल 23 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर, फॉर्म-6 और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कुछ फैसलों पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या अनुमोदन के बिना लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय या सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल
ब्रजेश सिंह के पत्र में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया है, उनमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया और SIR के दौरान डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल से जुड़े विषय शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी इन मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में मतदाता डेटा और सॉफ्टवेयर के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
अब अटॉर्नी जनरल की सहमति पर नजर
अवमानना कार्यवाही शुरू करने का अगला कदम अटॉर्नी जनरल की सहमति पर निर्भर करेगा। कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। फिलहाल ब्रजेश सिंह की ओर से लगाए गए आरोप केवल उनके पत्र और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने या किसी उल्लंघन को स्थापित करने का कोई न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।


















