Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के अदालत के निर्देशों का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से पहले शो-कॉज नोटिस जारी किया है। अदालत ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामला झारखंड के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने से जुड़ी स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका से संबंधित है। इसी मामले में पहले भी DGP को अवमानना नोटिस दिया जा चुका है और सरकार को सभी थानों में कैमरे लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।
चार बार टेंडर के बावजूद नहीं लग सके कैमरे
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के लिए अब तक चार बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन इसका अपेक्षित परिणाम नहीं निकला। अदालत ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए आदेश के प्रभावी अनुपालन पर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि थानों में CCTV केवल कैमरे लगाने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि उनकी प्रभावी निगरानी और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी जरूरी है।
2018 के बाद 450 से अधिक कस्टोडियल डेथ का हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 2018 के बाद राज्य में 450 से अधिक कस्टोडियल डेथ के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। इससे पहले अदालत के समक्ष राज्य सरकार की ओर से 2018 से 2025 के बीच करीब 437 मौतों से संबंधित आंकड़े रखे गए थे। अदालत ने ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया। पुलिस थानों में CCTV की व्यवस्था को हिरासत में रहने वाले लोगों के अधिकारों और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के जवाब पर कोर्ट ने जताई असंतुष्टि
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब और अब तक की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत की टिप्पणी थी कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद अनुपालन में पर्याप्त प्रगति नजर नहीं आ रही है। मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 30 सितंबर तक CCTV लगाने की स्थिति और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
तरुण महतो की हिरासत में पिटाई के मामले से जुड़ा है प्रकरण
यह मामला झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के पूर्व इचागढ़ प्रत्याशी तरुण महतो से जुड़े कथित हिरासत में मारपीट के मामले के बाद शुरू हुई न्यायिक निगरानी से जुड़ा है। उनकी पत्नी की ओर से मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। महतो को 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित मारपीट के आरोप सामने आए थे। इसी मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में CCTV कैमरों की उपलब्धता और उनके संचालन का मुद्दा भी सामने आया। सितंबर 2026 में रांची के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की जांच और खराब कैमरों को तत्काल दुरुस्त करने का निर्देश भी दिया गया था। अब मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को शो-कॉज नोटिस मिलने के बाद मामले में अगली सुनवाई पर उनके जवाब और अनुपालन की स्थिति पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।




















