Samachar Post रिपोर्टर, गढ़वा : गढ़वा जिले के रमना प्रखंड निवासी संदीप कुमार अपने अनोखे जुनून और साहसिक कार्यों के कारण इन दिनों चर्चा में हैं। पेशे से व्यवसायी संदीप ने सांपों के संरक्षण और लोगों की सुरक्षा को अपना मिशन बना लिया है। इसी समर्पण के चलते वह क्षेत्र में ‘सर्प मित्र’ के नाम से पहचान बना चुके हैं। अब तक वह 1000 से अधिक सांपों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा चुके हैं। संदीप कुमार का कहना है कि सांपों को बचाने और लोगों को जागरूक करने का कार्य उन्होंने शौक के तौर पर शुरू किया था, जो धीरे-धीरे उनका जुनून बन गया। आज बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से उन्हें सांप पकड़ने और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए लगातार कॉल आते हैं।
किताबों और यूट्यूब से सीखी रेस्क्यू की तकनीक
संदीप बताते हैं कि उन्होंने सांपों के व्यवहार और रेस्क्यू की तकनीक के बारे में जानकारी किताबों और यूट्यूब के माध्यम से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने व्यवस्थित तरीके से इस क्षेत्र में काम शुरू किया। जैसे ही किसी घर, खेत या आबादी वाले इलाके में सांप निकलने की सूचना मिलती है, संदीप अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचते हैं और सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल या उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देते हैं। संदीप के अनुसार, अब तक किए गए रेस्क्यू अभियानों में करीब 800 कोबरा सांप शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य विषैले और गैर-विषैले सांपों को भी सुरक्षित पकड़ा और लोगों को संभावित खतरे से बचाया है।
रसेल वाइपर जैसे खतरनाक सांपों को भी बचाया
सर्प मित्र संदीप ने रसेल वाइपर समेत कई अत्यंत विषैले सांपों का भी सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। उनका कहना है कि रेस्क्यू के दौरान विशेष सुरक्षा उपकरण, ग्लव्स और पेशेवर तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि सांप और इंसान दोनों सुरक्षित रहें। संदीप बताते हैं कि उन्हें प्रतिदिन औसतन 30 से 40 कॉल सांप निकलने की सूचना से संबंधित प्राप्त होती हैं। कई बार उन्होंने अधिकारियों के आवासों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से भी सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है।
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संरक्षण के साथ जागरूकता का भी अभियान
संदीप की यह पहल केवल सांपों को बचाने तक सीमित नहीं है। वह लोगों को यह भी समझाते हैं कि सांप पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं तथा उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए। उनके सहयोगी विकास का कहना है कि संदीप के साथ इस अभियान में जुड़कर उन्हें भी वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर मिला है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

