झारखंड सचिवालय सेवा में प्रमोशन को लेकर बढ़ा असंतोष, 1995 बैच के अधिकारियों ने उठाए सवाल

Rupa Kumari | July 8, 2026 | 02:46 PM IST
  • प्रोन्नति नीति में बदलाव से प्रभावित होने का दावा, पद सृजन और कैडर रिवीजन को लेकर कार्मिक विभाग पर लगाए आरोप

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच प्रोन्नति (पदोन्नति) को लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्ष 1995 बैच के अधिकारियों का कहना है कि राज्य गठन के बाद लागू की गई नीतियों के कारण उनकी पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जिससे वे लंबे समय से उच्च पदों पर पदोन्नत होने से वंचित हैं। अधिकारियों का दावा है कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य गठन के समय अविभाजित बिहार से आए सचिवालय सेवा के कर्मचारियों को केंद्र सरकार द्वारा राज्य में समायोजित किया गया था। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति जिस आरक्षण व्यवस्था के तहत हुई थी, उसी आधार पर पदोन्नति भी दी जानी चाहिए थी। हालांकि बाद में राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति और पदोन्नति के लिए नई आरक्षण व्यवस्था लागू कर दी गई, जिसका प्रभाव पुराने कर्मचारियों की पदोन्नति पर भी पड़ा।

पदोन्नति में असमानता का आरोप

सचिवालय सेवा के कुछ अधिकारियों का आरोप है कि नई व्यवस्था के कारण सामान्य, पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति वर्ग के कई अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित हुई। उनका कहना है कि समान बैच के अधिकारियों के बीच पदोन्नति में बड़ा अंतर देखने को मिला, जिससे सेवा संवर्ग में असंतोष बढ़ा है। अधिकारियों का कहना है कि बिहार सरकार ने समय-समय पर पदों का सृजन कर सचिवालय सेवा के अधिकारियों को पदोन्नति का अवसर दिया। इसके विपरीत झारखंड में लंबे समय से पद सृजन नहीं होने के कारण कई अधिकारी अपर सचिव स्तर पर ही कार्यरत हैं। उनका दावा है कि बिहार में 1995 बैच के अधिकांश अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर तक पहुंच चुके हैं, जबकि झारखंड में समान बैच के अधिकारी अब भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पद सृजन का मामला फिर चर्चा में

जानकारी के अनुसार, सचिवालय सेवा में पदोन्नति के लिए पद सृजन का प्रस्ताव पूर्व में सरकार के स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजा गया था। अधिकारियों का आरोप है कि बाद में कैडर रिवीजन की प्रक्रिया के कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ सका। इससे वर्षों से लंबित पदोन्नति और अधिक प्रभावित हुई है। सचिवालय सेवा के अधिकारियों ने हाल में कैबिनेट से पारित एक संशोधन प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे पदोन्नति की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। सेवा संवर्ग के भीतर इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है और अधिकारी पद सृजन तथा लंबित पदोन्नति मामलों के शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।

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कामकाज प्रभावित होने की आशंका

सचिवालय सेवा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई तो कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष और बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से पदोन्नति संबंधी लंबित मामलों का समाधान निकालने और सेवा संवर्ग की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।

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