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चाईबासा में 10 लाख का इनामी नक्सली समेत 4 माओवादियों ने किया सरेंडर

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  • ऑपरेशन ‘नवजीवन-III’ के तहत पुलिस और CRPF के समक्ष आत्मसमर्पण, हथियार और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद

Samachar Post रिपोर्टर, चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) संगठन के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमेटी सदस्य समेत चार सक्रिय नक्सलियों ने मंगलवार को पुलिस और CRPF के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और झारखंड जगुआर द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत ऑपरेशन “नवजीवन-III” के अंतर्गत यह आत्मसमर्पण हुआ। पुलिस के अनुसार, कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय नक्सलियों को सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य भी शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मारू उर्फ विक्रम का है, जो भाकपा (माओवादी) का जोनल कमेटी सदस्य था। उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ चाईबासा और सरायकेला जिलों में कुल 96 मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन, 843 राउंड कारतूस सहित अन्य सामग्री बरामद की गई।सरेंडर करने वाले अन्य नक्सलियों में कोदोमुनी कोड़ा, पिंकी पूर्ती और अनिता तामसोय शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में विभिन्न नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामले दर्ज हैं।

पहले भी बड़ी संख्या में हो चुके हैं आत्मसमर्पण

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। वहीं ऑपरेशन “नवजीवन-I” के तहत मई 2026 में 27 और ऑपरेशन “नवजीवन-II” के तहत जुलाई 2026 में 14 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की थी। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम जिले में कुल 49 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसी अवधि में 22 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि 60 नक्सलियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

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सामुदायिक पुलिसिंग का दिख रहा असर

पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियान, संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और सरकारी पुनर्वास नीति के कारण नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ा है, जिससे उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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