Samachar Post रिपोर्टर, गुमला : गुमला जिला मुख्यालय में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया बख्तर साय मुंडन सिंह ऑडिटोरियम इन दिनों बदहाली का शिकार है। उचित रखरखाव और नियमित देखरेख के अभाव में भवन की स्थिति लगातार खराब होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिसर में असामाजिक तत्वों के जमावड़े और नशे के सेवन का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि जिस भवन का निर्माण कला-संस्कृति और सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब उपेक्षा का शिकार हो रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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कला-संस्कृति और सरकारी कार्यक्रमों के लिए बना था ऑडिटोरियम
गांधी पार्क के पास जिला प्रशासन की ओर से बख्तर साय मुंडन सिंह ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया था। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस भवन का उद्देश्य जिले में सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था। ऑडिटोरियम में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था है। यहां कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं और मुख्यमंत्री समेत कई प्रमुख हस्तियां भी कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं।
रखरखाव के अभाव में लगातार बिगड़ रही स्थिति
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों से भवन की नियमित देखरेख और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। इसका असर भवन की स्थिति पर दिखाई दे रहा है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं कराया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह भवन धीरे-धीरे अनुपयोगी हो सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण उरांव ने आरोप लगाया कि ऑडिटोरियम परिसर में आए दिन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग यहां नशे का सेवन भी करते हैं। कृष्ण उरांव के मुताबिक भवन की खराब स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण यहां असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी हुई है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

बालिका आवासीय केंद्र की सुरक्षा पर भी चिंता
ऑडिटोरियम के पास ही बालिका खिलाड़ियों के लिए आवासीय केंद्र संचालित होता है। केंद्र की कोच बिना केरकेट्टा ने भी परिसर में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आसपास ऐसे लोगों की आवाजाही से आवासीय केंद्र में रहने वाली बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। उन्होंने प्रशासन से ऑडिटोरियम की नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। बिना केरकेट्टा ने यह भी सुझाव दिया कि यदि भवन का उपयोग नियमित कार्यक्रमों के लिए नहीं हो पा रहा है तो इसे कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उनके मुताबिक गुमला में कई युवा कुश्ती में करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन उचित प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी है।
शराब की बोतलें मिलने का दावा
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद शब्बू ने कहा कि गुमला जैसे जिले में इस तरह के बड़े ऑडिटोरियम की जरूरत है। उनके मुताबिक भवन का बेहतर संचालन होने पर यहां सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि भवन परिसर में शराब की बोतलें और अन्य सामान बिखरे हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने प्रशासन से भवन की साफ-सफाई, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में जल्द संज्ञान लेकर भवन की स्थिति सुधारनी चाहिए, ताकि सरकारी धन से तैयार इस महत्वपूर्ण भवन का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

Reporter | Samachar Post


