बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, बोले- विवादित और दागी अफसरों पर ही क्यों मेहरबानी?

Rupa Kumari | August 21, 2026 | 11:04 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राज्य में ईमानदार और सक्षम अधिकारियों की कमी नहीं है, फिर भी संवेदनशील पदों पर विवादित और आरोपों से घिरे अधिकारियों को ही क्यों जिम्मेदारी दी जाती है।

डीजीपी नियुक्ति पर उठाए सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अनुशंसाओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि केवल एक अधिकारी को छोड़कर यूपीएससी द्वारा अनुशंसित किसी अधिकारी को डीजीपी नहीं बनाया गया। जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई, उसे भी निर्धारित समय से पहले पद से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि अखिल भारतीय सेवा नियमों को दरकिनार कर सेवानिवृत्त अधिकारियों को डीजीपी पद पर बनाए रखने की नौबत आ रही है। मरांडी ने सवाल किया कि क्या डीजीपी का पद अब संवैधानिक जिम्मेदारी के बजाय राजनीतिक कृपा का पद बन गया है।

जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर चिंता

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि किसी अधिकारी को यह महसूस हो कि उसकी कुर्सी कानून और नियमों के बजाय सत्ता की कृपा पर निर्भर है, तो उसके राजनीतिक दबाव में काम करने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने राज्य की जांच एजेंसियों सीआईडी और एसीबी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इन संस्थाओं की कमान विवादित अधिकारियों के हाथों में होगी तो जनता उनकी निष्पक्षता पर कैसे भरोसा करेगी।

पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की मांग

मरांडी ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त किया जाना चाहिए और ईमानदार तथा बेदाग अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी सरकार या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह संस्था है।

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इतिहास जवाब मांगेगा: मरांडी

अपने बयान के अंत में मरांडी ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन उसके फैसलों का मूल्यांकन इतिहास करता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून सत्ता से ऊपर रहे। अन्यथा भविष्य में यह सवाल उठेगा कि झारखंड को कानून के शासन वाला राज्य छोड़ा गया या राजनीतिक प्रभाव और भय से संचालित पुलिस तंत्र वाला राज्य।

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