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NEET-2026 काउंसलिंग में रक्त संबंधी दिव्यांगता का विकल्प नहीं, हीमोफीलिया सोसाइटी ने CM से मांगा हस्तक्षेप

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Samachar Post रिपोर्टर,रांची : NEET-2026 के बाद झारखंड में MBBS दाखिले के लिए राज्य स्तरीय काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच हीमोफीलिया सोसाइटी, रांची चैप्टर ने काउंसलिंग पोर्टल में रक्त संबंधी दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का अलग विकल्प नहीं होने का मुद्दा उठाया है। सोसाइटी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सोसाइटी के रांची चैप्टर के सचिव संतोष कुमार जायसवाल का कहना है कि हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी रक्त संबंधी बीमारियों से दिव्यांगता का सामना करने वाले पात्र अभ्यर्थियों को कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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RPwD Act में रक्त संबंधी बीमारियां शामिल

सोसाइटी ने अपनी मांग के समर्थन में Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (RPwD Act) का हवाला दिया है। कानून की अनुसूची में हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल डिजीज को ‘ब्लड डिसऑर्डर’ के तहत निर्दिष्ट दिव्यांगताओं में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार की दिव्यांगता आकलन संबंधी गाइडलाइन में भी हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल डिजीज के लिए अलग प्रावधान दर्ज हैं। हालांकि, किसी अभ्यर्थी को आरक्षण जैसे लाभ के लिए लागू नियमों के अनुसार निर्धारित पात्रता और वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। RPwD Act में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया का भी प्रावधान है।

काउंसलिंग फॉर्म में विकल्प नहीं होने पर सवाल

हीमोफीलिया सोसाइटी का आरोप है कि झारखंड की राज्य काउंसलिंग के आवेदन फॉर्म में रक्त संबंधी दिव्यांगताओं के लिए स्पष्ट विकल्प नहीं होने से पात्र अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है। संगठन के मुताबिक, NEET में आवश्यक अंक हासिल करने वाले कुछ अभ्यर्थी राज्य स्तरीय काउंसलिंग में अपनी दिव्यांगता श्रेणी के तहत अधिकार का दावा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय स्तर की काउंसलिंग पर निर्भर रहने की स्थिति बन रही है। सोसाइटी ने काउंसलिंग पोर्टल में तत्काल संशोधन कर हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल डिजीज से संबंधित पात्र अभ्यर्थियों के लिए स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है।

लोकसभा में भी उठ चुका है मुद्दा

संतोष कुमार जायसवाल के अनुसार, रक्त संबंधी विकारों से जुड़े दिव्यांग लोगों को आरक्षण और अन्य अधिकार दिए जाने का मुद्दा 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में भी उठाया गया था। सोसाइटी का कहना है कि केंद्र स्तर पर रक्त संबंधी विकारों को दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल किए जाने और कानून के तहत अधिकारों का उल्लेख किए जाने के बावजूद राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया में स्पष्ट विकल्प नहीं होना चिंता का विषय है।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

हीमोफीलिया सोसाइटी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि NEET-2026 की झारखंड राज्य काउंसलिंग में RPwD Act के तहत पात्र रक्त संबंधी दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। संगठन ने काउंसलिंग पोर्टल में जल्द संशोधन करने और संबंधित दिव्यांगता श्रेणियों के लिए स्पष्ट विकल्प जोड़ने की मांग की है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन और सीट आवंटन की प्रक्रिया में परेशानी न हो।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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