रिम्स में अब सिर्फ 3,500 रुपये में होगी गर्भस्थ शिशु की आनुवांशिक बीमारी की जांच, एक साल तक मिलेगी मुफ्त सुविधा

Meenu | August 1, 2026 | 11:37 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : रांची स्थित रिम्स (RIMS) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब यहां गर्भ में पल रहे शिशु में होने वाली गंभीर आनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारियों की प्रसवपूर्व जांच की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस सुविधा से उन परिवारों को समय रहते बीमारी की जानकारी मिल सकेगी, जिनमें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आनुवांशिक रोग होने की आशंका रहती है। फिलहाल इस जांच की निर्धारित लागत 3,500 रुपये है, लेकिन डीबीटी-निदान केंद्र परियोजना के तहत अगले एक वर्ष तक यह सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

यह भी पढ़ें : अगस्त के पहले दिन कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता, 200 रुपये से अधिक की कटौती; जानें नए दाम

इन गंभीर आनुवांशिक बीमारियों की होगी जांच

रिम्स के जेनेटिक्स एवं जीनोमिक्स विभाग के अनुसार अब गर्भावस्था के दौरान निम्न गंभीर आनुवांशिक बीमारियों की पहचान संभव होगी सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया , ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी। विभागाध्यक्ष डॉ. अनूपा प्रसाद ने बताया कि झारखंड में पहली बार इस तरह की प्रसवपूर्व आनुवांशिक जांच की सुविधा शुरू की गई है। अब तक विभाग में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के 26 प्रसवपूर्व परीक्षण किए जा चुके हैं, जिनके आधार पर चार गंभीर रूप से प्रभावित गर्भस्थ शिशुओं के जन्म को रोका जा सका है।

दुर्लभ बीमारी की भी सफल जांच

रिम्स ने पहली बार बीटा-कीटोथायोलेज की कमी जैसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी का भी सफल प्रसवपूर्व निदान किया है। यह बीमारी ACAT1 जीन में बदलाव के कारण होती है। विशेषज्ञों ने आनुवांशिक जांच और जेनेटिक काउंसलिंग की मदद से प्रभावित गर्भस्थ शिशु के जन्म को रोकने में सफलता हासिल की है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश आनुवांशिक बीमारियों का उपचार सीमित होता है, इसलिए समय पर जांच और परामर्श बेहद महत्वपूर्ण है।

15 हजार की जांच अब 3,500 रुपये में

यह जांच गर्भावस्था के 9 से 11 सप्ताह तथा 16 से 20 सप्ताह के बीच कराई जा सकती है। जांच के लिए गर्भ से आवश्यक नमूना लेकर पीसीआर , सैंगर सीक्वेंसिंग और एमएलपीए जैसी आधुनिक डीएनए तकनीकों का उपयोग किया जाता है। पूरी जांच प्रक्रिया में एक से दो सप्ताह का समय लगता है। रिम्स में इसकी लागत 3,500 रुपये निर्धारित की गई है, जबकि निजी लैब में यही जांच 15,000 रुपये या उससे अधिक में होती है। डीबीटी-निदान केंद्र परियोजना के तहत अगले एक वर्ष तक यह जांच पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी इस आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठा सकेंगे और गंभीर आनुवांशिक बीमारियों की समय रहते पहचान संभव हो सकेगी।

Share this news

संबंधित खबरें