मौसमक्रिकेटहेल्थक्राइमस्पोर्ट्सबॉलीवुडएजुकेशनबिजनेसलाइफस्टाइलदेशविदेश

PMC कर्मचारियों की हड़ताल से पटना की सफाई व्यवस्था चरमराई, शहरभर में लगे कचरे के ढेर

Samachar Post रिपोर्टर, पटना : पटना नगर निगम (PMC) के सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब राजधानी की सड़कों और मोहल्लों में साफ दिखाई देने लगा है। घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर सड़क सफाई तक की सेवाएं प्रभावित होने से कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं। लगातार बढ़ते कचरे के कारण लोगों को दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शहर के कई इलाकों में बिगड़े हालात

हड़ताल के चलते किदवईपुरी के कवि रमन पथ, इंद्रपुरी में अटल पथ की सर्विस लेन, नवीन किशोर सिन्हा पथ, मीठापुर मेन रोड और राजीव नगर मेन रोड समेत कई प्रमुख इलाकों में कचरा जमा हो गया है। हार्डिंग रोड पर नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी खड़ी नजर आईं, जिससे सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती दिख रही है। यह हड़ताल 30 जुलाई से राज्यव्यापी आंदोलन के तहत शुरू हुई है। इसमें पटना नगर निगम के लगभग 8,000 स्थायी, दिहाड़ी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। सामान्य दिनों में पटना शहर से प्रतिदिन करीब 1,200 टन कचरा उठाया जाता है, लेकिन हड़ताल के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई है।

यह भी पढ़ें : महेंद्र सिंह धोनी से मिलने रांची पहुंचे ऋषभ पंत, JSCA से सामने आई तस्वीर ने बढ़ाया उत्साह

बातचीत विफल होने के बाद शुरू हुई हड़ताल

कर्मचारी संगठन पिछले एक महीने से अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन कर रहे थे। 30 जून से 25 जुलाई तक धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए। इसके बाद 28 जुलाई को शहरी विकास एवं आवास मंत्री के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। 29 जुलाई को कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकाला और अगले दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। मानसून के बीच शहर में कचरा जमा होने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि बारिश के मौसम में कचरे के ढेर मच्छरों और मक्खियों के पनपने का कारण बन सकते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

कर्मचारियों की क्या हैं प्रमुख मांगें?

नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने सरकार और प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित करने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को नगर निगम में समायोजित करने तथा ACP और MACP जैसी पदोन्नति एवं सेवा संबंधी सुविधाओं को बहाल करने की मांग प्रमुख है। यदि जल्द ही कर्मचारियों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बनती है, तो राजधानी में सफाई व्यवस्था की स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से न केवल पर्यावरणीय बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी संकट भी गहरा सकता है।

Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment