Samachar Post रिपोर्टर,जामताड़ा : झारखंड के जामताड़ा जिले को काजू उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में उपायुक्त (DC) आलोक कुमार ने नाला प्रखंड के डाडर मौजा स्थित करीब 95.59 एकड़ सरकारी भूमि पर विकसित काजू बागान का निरीक्षण किया और उत्पादन, सुरक्षा, विपणन तथा भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की।
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95 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है काजू बागान
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों से काजू बागान की वर्तमान स्थिति, पौधों की संख्या, प्रति पौधा उत्पादन और विपणन व्यवस्था की जानकारी ली। पूर्व में किए गए सर्वे के अनुसार, डाडर मौजा के बागान में करीब 34,511 काजू के पौधे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक पौधे से औसतन 5 से 20 किलोग्राम तक काजू का उत्पादन होता है। इसके अलावा जामताड़ा जिले के अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में काजू के पौधे मौजूद हैं।
प्रसंस्करण इकाई नहीं होने से किसानों को हो रहा नुकसान
निरीक्षण के दौरान स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने उपायुक्त को बताया कि जिले में काजू प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाई नहीं होने के कारण उन्हें अपनी उपज बिचौलियों को कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बागान की घेराबंदी नहीं होने और नियमित देखरेख के अभाव में फसल को नुकसान होता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन संरक्षण और प्रसंस्करण की व्यवस्था सुनिश्चित करे तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

कृषि विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश
उपायुक्त आलोक कुमार ने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया कि काजू उत्पादन में अग्रणी राज्यों की प्रसंस्करण इकाइयों का अध्ययन कर जामताड़ा में ऐसी इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर व्यावहारिक और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके साथ ही प्रति एकड़ लागत, संभावित उत्पादन और किसानों की शुद्ध आय का आकलन कर विभाग को रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को काजू की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
जामताड़ा को राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई जाएगी पहचान
उपायुक्त ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में भी जामताड़ा में काजू बागवानी का विषय लाया गया है। इसके बाद जिला प्रशासन एक समग्र कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य जामताड़ा को काजू उत्पादन के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करना, स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण उद्योग विकसित कर रोजगार के अवसर बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और जिले के राजस्व को मजबूत करना है। प्रशासन को उम्मीद है कि योजना को जल्द धरातल पर उतारकर जिले में काजू आधारित उद्योगों की शुरुआत की जा सकेगी।

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