Samachar Post डेस्क, रांची : राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छंद नहीं गाने पर दंड के प्रावधान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या किसी कार्यपालक आदेश के जरिए राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर ऐसा प्रावधान बनाया जा सकता है, जिसके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई हो। यह मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने आया। अदालत ने फिलहाल इस मामले को आगे सुनने के लिए अक्टूबर की तारीख तय की है।
गृह मंत्रालय के आदेश को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ता ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश और उससे जुड़े प्रावधानों को चुनौती दी है। याचिका में यह मुद्दा उठाया गया है कि कार्यपालक आदेश के आधार पर किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय गीत गाने के लिए बाध्य किया जा सकता है या उसके खिलाफ दंड का प्रावधान किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट मार्च 2026 में भी ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर चुका है। उस समय अदालत ने कहा था कि केंद्र की ओर से जारी संबंधित निर्देश सलाहकारी प्रकृति के थे और उनमें पालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान नहीं था।

सॉलिसिटर जनरल ने नोटिस जारी करने पर जताई आपत्ति
मंगलवार को सुनवाई शुरू होने पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि इस मामले में सीधे नोटिस जारी करने से अनावश्यक चर्चा पैदा हो सकती है। उन्होंने इसके बजाय याचिका की प्रति उपलब्ध कराने और सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का अनुरोध किया। इसके बाद अदालत ने याचिका की कॉपी सॉलिसिटर जनरल को देने का निर्देश दिया और मामले को अक्टूबर में सुनने की बात कही।
2026 में वंदे मातरम् को लेकर बदले कानूनी प्रावधान
2026 में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन के जरिए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी संबंधित कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया। संशोधित प्रावधान जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान डालने पर दंड का प्रावधान करता है। हालांकि, उपलब्ध कानूनी जानकारी के अनुसार इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस व्यापक कानूनी सवाल पर विचार करेगा कि गायन में बाधा डालने और स्वयं गीत नहीं गाने के बीच कानून की सीमा क्या है।
छह छंदों के आधिकारिक संस्करण को लेकर भी विवाद
गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में ‘वंदे मातरम्’ के आधिकारिक संस्करण और उसके गायन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें पूर्ण रचना के छह छंदों को आधिकारिक संस्करण के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसी बीच कर्नाटक सरकार के केवल पहले दो छंद गाने संबंधी आदेश को लेकर अलग से कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका भी दायर हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कार्यपालक आदेश, राष्ट्रीय गीत के गायन और दंडात्मक कानून के बीच कानूनी संबंध किस तरह तय किया जाता है।




















