Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रामगढ़ के रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के विकास से जुड़े अवमानना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए पर्यटन विभाग के सचिव को 29 सितंबर को अदालत में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह मामला याचिकाकर्ता संजीव कुमार सिंह की अवमानना याचिका से जुड़ा है।
सरकार के जवाब पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि महाधिवक्ता किसी कारण से सुनवाई में शामिल नहीं हो सके। अदालत ने पिछली सुनवाई के आदेश के संबंध में सरकार की ओर से मिले निर्देशों की जानकारी मांगी, लेकिन अपर महाधिवक्ता ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई निर्देश उपलब्ध नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने पर्यटन विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
रजरप्पा मंदिर के विकास को लेकर है मामला
याचिका में हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन की मांग की गई है। वर्ष 2023 में अदालत ने रजरप्पा मंदिर परिसर और भैरवी नदी क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ी कई व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इनमें मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाट, शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधा, अतिक्रमण हटाना और नदी के चौड़ीकरण जैसे कार्य शामिल हैं। पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि मंदिर के पुनरुद्धार के लिए करीब 102 करोड़ रुपये की डीपीआर को तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही हटाए गए 254 दुकानदारों के पुनर्वास और अस्थायी दुकानों की व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए गए थे।
PRASAD योजना से फंड लेने पर भी उठे थे सवाल
मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि रजरप्पा मंदिर के विकास के लिए केंद्र सरकार की PRASAD योजना के तहत वित्तीय सहायता लेने पर विचार किया जा रहा है। इस पर अदालत ने सवाल उठाया था कि जब पहले पर्यटन विभाग की ओर से राज्य संसाधनों से राशि उपलब्ध कराने की बात कही गई थी और डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त किया गया था, तो बाद में रुख क्यों बदला। अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि यदि केंद्र की योजना से सहायता लेने का विचार पहले से था, तो इसकी जानकारी पूर्व की कार्यवाही में क्यों नहीं दी गई। अब अगली सुनवाई में पर्यटन विभाग के सचिव को सरकार की स्थिति और हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों पर हुई कार्रवाई के संबंध में जवाब देना होगा।

















