Samachar Post रिपोर्टर, धनबाद : शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH), धनबाद में MBBS सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही के कारण अधूरी रह गई। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने फैकल्टी की कमी का हवाला देते हुए मेडिकल कॉलेज में सीट वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही इस शैक्षणिक सत्र में कॉलेज की MBBS सीटें 100 से बढ़ाकर 150 करने की योजना पर विराम लग गया है।
NMC ने फैकल्टी की कमी को बताया मुख्य कारण
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने SNMMCH में MBBS की सीटें 100 से बढ़ाकर 150 करने का प्रस्ताव NMC को भेजा था। हालांकि निरीक्षण और दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान NMC ने पाया कि मेडिकल कॉलेज में आवश्यक संख्या में फैकल्टी उपलब्ध नहीं है। इसी आधार पर प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया।
सीट वृद्धि के लिए जरूरी हैं पर्याप्त शिक्षक
मेडिकल शिक्षा के मानकों के अनुसार किसी भी मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाने के लिए सभी विभागों में निर्धारित संख्या में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट का होना अनिवार्य है। पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध होने पर ही छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में विभिन्न शैक्षणिक पदों पर प्रोन्नति के लिए योग्य चिकित्सकों से आवेदन आमंत्रित किए थे। धनबाद सिविल सर्जन कार्यालय में कई चिकित्सकों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन भी जमा किए थे।

आवेदन समय पर नहीं भेजे जाने का आरोप
बताया जा रहा है कि सिविल सर्जन कार्यालय स्तर पर आवेदन पत्रों को समय पर आगे नहीं भेजा गया। आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर हुई इस चूक के कारण प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और मेडिकल कॉलेज में आवश्यक फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हो पाई। इसका सीधा असर MBBS सीट वृद्धि के प्रस्ताव पर पड़ा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती तो SNMMCH में 50 अतिरिक्त MBBS सीटों पर नामांकन संभव हो पाता, जिससे राज्य के अधिक छात्रों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलता। लेकिन NMC की अस्वीकृति के बाद फिलहाल कॉलेज में पहले की तरह 100 सीटों पर ही नामांकन होगा।
यह भी पढ़ें : डिमना डैम में नहाने के दौरान युवक की डूबकर मौत, छोटे भाई के सामने हुआ दर्दनाक हादसा
जवाबदेही तय करने की उठी मांग
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण राज्य के मेडिकल छात्रों को नुकसान हुआ है। अब संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जा रही है।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

