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पद्म भूषण से सम्मानित होंगे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, राष्ट्रपति भवन में पत्नी रूपी सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची :राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में झारखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेताओं में से एक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को सम्मानित करते हुए देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान करेंगी। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन के नाम की घोषणा की थी। उन्हें आदिवासी समाज, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।

रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी सम्मान

समारोह में शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन उनकी ओर से पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर उनकी पुत्रवधू और झारखंड की वरिष्ठ नेता कल्पना सोरेन भी मौजूद रहेंगी। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि परिवार के सदस्य सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। सम्मान की घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है।

झारखंड आंदोलन को दी नई पहचान

शिबू सोरेन ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन को मजबूत नेतृत्व दिया। उन्होंने आदिवासियों, गरीबों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और उनकी आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनकी राजनीतिक यात्रा केवल सत्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक न्याय और जनाधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन गई। उनके योगदान को देखते हुए झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से उन्हें भारत रत्न देने की मांग भी की थी।

संघर्ष से नेतृत्व तक का सफर

11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन ने बचपन से ही आदिवासी समाज पर हो रहे शोषण, विस्थापन और जमींदारी अत्याचारों को करीब से देखा। यही अनुभव उनके सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष की प्रेरणा बने। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और राज्य की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली भूमिका निभाई। 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों के लिए उनका योगदान आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

पद्म भूषण सम्मान को झारखंड और आदिवासी समाज के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इसे शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान बताया है।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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