Samachar Post रिपोर्टर, साहिबगंज : झारखंड के साहिबगंज जिले के 14 वर्षीय जीत रक्षित ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy) नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के कारण जीत पिछले कई वर्षों से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनके पिता मुन्ना रक्षित इलाज और फिजियोथेरेपी का खर्च जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि सरकारी सहायता के लिए कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद अब तक पर्याप्त मदद नहीं मिली है। बोरियो बाजार के बंगाली टोला में रहने वाले जीत को इलाज के साथ-साथ आधुनिक मेडिकल बेड और स्वचालित व्हीलचेयर की भी जरूरत है। परिवार को उम्मीद है कि सरकार उनकी स्थिति पर ध्यान देगी और इलाज व जरूरी सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी।
2020 में दिखने लगे थे बीमारी के लक्षण
जीत का जन्म 15 मई 2013 को बोरियो में हुआ था। शुरुआती वर्षों में वह सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जाते थे। परिवार के मुताबिक, वर्ष 2020 में उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने लगी। चलते समय वह लड़खड़ाकर गिर जाते थे और घुटनों को हाथों से सहारा देकर उठने की कोशिश करते थे। इसके बाद उनकी परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती गई। परिवार ने जीत को दुमका, आसनसोल और रांची के अस्पतालों में दिखाया। इसके बाद उन्हें रिम्स और तमिलनाडु के सीएमसी वेल्लोर भी ले जाया गया। परिजनों के अनुसार, बीमारी बढ़ने के साथ जीत के पैरों की क्षमता लगभग समाप्त हो गई है और अब उनके हाथों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं।

फिजियोथेरेपी के लिए हर बार 60 हजार रुपये का खर्च
परिवार को हिमाचल प्रदेश के मानव मंदिर में फिजियोथेरेपी कराने की सलाह मिली थी। खबर के अनुसार, वहां साल में तीन बार जाना पड़ता है और हर बार करीब 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिता मुन्ना रक्षित के लिए यह खर्च जुटाना मुश्किल हो रहा है। परिवार का कहना है कि जीत के इलाज और देखभाल पर लगातार खर्च हो रहा है, जबकि उनकी आर्थिक क्षमता सीमित है। जीत की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी विशेष सुविधाओं की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री से मिली थी 40 हजार रुपये की सहायता
जीत के पिता मुन्ना रक्षित स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक से आर्थिक सहायता की गुहार लगा चुके हैं। परिवार के मुताबिक, एक बार 40 हजार रुपये की मदद मिली थी, लेकिन इलाज और देखभाल की जरूरतों के लिहाज से यह रकम पर्याप्त नहीं है। परिवार का यह भी कहना है कि जीत के दिव्यांगता प्रमाणपत्र में विसंगतियों के कारण उन्हें दिव्यांगों के लिए उपलब्ध कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्हें मेडिकल बेड और स्वचालित व्हीलचेयर की तत्काल जरूरत है।
दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए सहायता का प्रावधान
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत पात्र मरीजों को इलाज के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। वहीं, झारखंड की मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत भी निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार आर्थिक मदद मिल सकती है। हालांकि, इन योजनाओं के तहत सहायता पाने के लिए पात्रता, बीमारी से जुड़े दस्तावेज और संबंधित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। परिवार का कहना है कि जीत को अब तक पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिली है। जीत के परिवार को उम्मीद है कि संबंधित विभाग उनकी बीमारी, इलाज की जरूरतों और दिव्यांगता प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देंगे, ताकि उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और इलाज व देखभाल का बोझ कुछ कम हो सके।






















