झारखंड में सुरक्षा विवाद पर बढ़ी सियासी तकरार, राधाकृष्ण किशोर बोले- डीजीपी सर्वेसर्वा नहीं

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा स्कॉर्ट वाहन और सुरक्षा गार्ड लौटाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने फिलहाल खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचने की कोशिश की। के राजू ने कहा कि वह फिलहाल पलामू दौरे पर हैं और पूरे मामले को समझने के बाद ही कुछ कहेंगे। वहीं केशव महतो कमलेश ने कहा कि उन्होंने खबर पढ़ी है, लेकिन सरकार के नियम-कानून समझने के बाद ही इस पर टिप्पणी करेंगे।

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राधाकृष्ण किशोर का डीजीपी पर फिर हमला

इधर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान डीजीपी तदाशा मिश्रा पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “डीजीपी पुलिस प्रमुख हैं, लेकिन राज्य की सर्वेसर्वा नहीं हैं।” वित्त मंत्री ने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि व्यवस्था पर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह अपने रुख से पीछे हटने वाले नहीं हैं। इससे पहले डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा था कि वित्त मंत्री के पास पर्याप्त वाहन उपलब्ध हैं और अन्य मंत्रियों को भी तीन-तीन स्कॉर्ट वाहन ही दिए गए हैं।

वित्त विभाग पर लगे आरोपों पर भी बोले मंत्री

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह द्वारा वित्त विभाग पर फाइल लटकाने और अनावश्यक सवाल पूछने के आरोपों पर भी राधाकृष्ण किशोर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार का संचालन ‘रूल्स ऑफ एग्जीक्यूटिव बिजनेस’ के तहत होता है। वह इस बात की जानकारी ले रहे हैं कि फाइल कब विभाग में आई और कब वापस की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर फाइल रोकने या लौटाने में देरी की है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे विवाद ने सरकार के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है। खासकर तब, जब कांग्रेस के ही कुछ मंत्री वित्त विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि वित्त मंत्री और डीजीपी के बीच पैदा हुए इस विवाद का समाधान कौन करेगा। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे पर होने के कारण फिलहाल कोई स्पष्ट राजनीतिक पहल नजर नहीं आ रही है।

चौथे स्कॉर्ट वाहन को लेकर उठ रहे सवाल

विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा चौथे स्कॉर्ट वाहन को लेकर बना हुआ है। यदि वित्त मंत्री को अतिरिक्त वाहन दिया जाता है, तो दूसरे मंत्रियों की ओर से भी ऐसी मांग उठ सकती है। वहीं अगर अतिरिक्त वाहन नहीं दिया जाता, तो उग्रवाद प्रभावित इलाके से आने वाले मंत्री की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से यह मामला अब प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है।

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