जमशेदपुर में वैज्ञानिकों का जुटान, औद्योगिक और रक्षा सुरक्षा पर मंथन

Rupa Kumari | April 10, 2026 | 11:28 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) में ‘अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (RLA-2026)’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से करीब 150 वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल हुए। इस दौरान मशीनों की सुरक्षा, उम्र बढ़ाने और औद्योगिक ढांचे की विश्वसनीयता पर विस्तृत चर्चा हुई।

पुराने औद्योगिक ढांचे पर चिंता

NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि देश के पेट्रोकेमिकल, ताप विद्युत और खनन क्षेत्र का 60 से 70 प्रतिशत ढांचा अपनी निर्धारित आयु से अधिक समय से उपयोग में है। ऐसे में दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि ‘Remaining Life Assessment’ (RLA) तकनीक से मशीनों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उन्हें सुरक्षित रूप से अधिक समय तक चलाया जा सकता है।

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रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ी जरूरत

सेमिनार के मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि RLA अब केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गया है। मिसाइल, लड़ाकू विमान और वायुयान प्रणालियों की सुरक्षित संचालन अवधि बढ़ाने में यह तकनीक अहम भूमिका निभा रही है।

AI के उपयोग पर जोर

विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए RLA प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया। सुझाव दिया गया कि इस तकनीक का उपयोग केवल मैकेनिकल सिस्टम तक सीमित न रखकर इलेक्ट्रिकल सिस्टम तक भी बढ़ाया जाए, ताकि संपूर्ण ढांचे की निगरानी बेहतर हो सके।

बड़ी कंपनियों की भागीदारी

सेमिनार में टाटा स्टील, ओएनजीसी, बीपीसीएल, एनटीपीसी और आईआईटी खड़गपुर समेत कई संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिभागियों ने मशीनों की सुरक्षा और औद्योगिक ढांचे को मजबूत बनाने को लेकर अपने अनुभव साझा किए। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से ऊर्जा, तेल-गैस, खनन और रक्षा क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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