नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी के VC को हटाने की मांग, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश सिंह को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। मंत्री ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में हुई कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है, इसलिए कुलपति को पद से हटाना जरूरी है। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर मार्च और दिसंबर 2025 में शिकायतें दी गई थीं। इसके बाद राज्यपाल सचिवालय की ओर से जांच के निर्देश दिए गए और वित्त विभाग ने विशेष ऑडिट कराया।

स्पेशल ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं का दावा

वित्त मंत्री के ज्ञापन के अनुसार, विशेष ऑडिट में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन से जुड़े मामले सामने आए हैं। इसमें परीक्षा संचालन मद में करीब 2.50 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान का उल्लेख किया गया है। ज्ञापन में दीक्षांत समारोह से जुड़े खर्च का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, समारोह के लिए 79.35 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया था, लेकिन राज्यपाल सचिवालय से सहमति लिए बिना राशि खर्च कर दी गई।

डिजिटल बोर्ड की राशि खर्च करने पर भी सवाल

मंत्री ने विश्वविद्यालय में डिजिटल बोर्ड की खरीद के लिए आवंटित राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में डिजिटल बोर्ड की खरीद के लिए 80 लाख रुपये आवंटित किए गए थे और यह राशि पीएल खाते में रखी गई थी। आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल कुलपति ने अपने स्तर से कर लिया। ज्ञापन में कहा गया है कि नियमों के अनुसार पीएल खाते में रखी राशि को दो साल बाद खर्च करने के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।

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वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार जब्त किए जाने का दावा

राधाकृष्ण किशोर के ज्ञापन में कहा गया है कि विशेष ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर कुलपति के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार जब्त किए जा चुके हैं। इसके बावजूद आरोप है कि वह अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने आशंका जताई है कि कुलपति पद पर बने रहने की स्थिति में कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने राज्यपाल से तत्काल उन्हें पद से हटाने का अनुरोध किया है। मंत्री की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होगी। मामले में कुलपति डॉ. दिनेश सिंह या विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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