Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं झारखंड प्रदेश अध्यक्ष Vinay Singh की मौत के मामले में पुलिस ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट अदालत में सौंप दी है। करीब एक वर्ष तीन माह तक चली जांच के बाद एमजीएम थाना पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है कि यह हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या का मामला था।
वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के आधार पर निष्कर्ष
पुलिस के अनुसार मामले की जांच फोरेंसिक, बैलिस्टिक, फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की गई। घटनास्थल से बरामद देसी पिस्तौल, कारतूस का खोखा और अन्य सामग्री को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया था। बैलिस्टिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि विनय सिंह को लगी गोली उसी पिस्तौल से चली थी, जो घटनास्थल पर उनके पास मिली थी। वहीं फिंगरप्रिंट और रासायनिक जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच के दौरान पुलिस ने विनय सिंह की पत्नी, पुत्र, रिश्तेदारों, परिचितों और अन्य स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस का कहना है कि सभी बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करने के बाद हत्या की आशंका की पुष्टि नहीं हो सकी।

पिछले वर्ष खेत में मिला था शव
गौरतलब है कि 20 अप्रैल 2025 को एमजीएम थाना क्षेत्र के गोडगोडा स्थित एक खेत से विनय सिंह का शव बरामद हुआ था। शव के पास उनकी स्कूटी खड़ी थी और हाथ में पिस्तौल फंसी हुई मिली थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। मौत के बाद करणी सेना और क्षत्रिय समाज के लोगों ने इसे हत्या बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। परिजनों की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठी थी।
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अंतिम फैसला अदालत करेगी
लंबी जांच के बाद पुलिस ने अदालत में अंतिम प्रतिवेदन दाखिल करते हुए मामले को आत्महत्या का बताया है। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के तहत ही होगा। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों में हत्या की पुष्टि नहीं होने के कारण केस क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी गई है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

