JPSC-JSSC कार्रवाई के बाद प्रशासनिक ढांचे पर असर, झाप्रसे के आधे से अधिक बेसिक ग्रेड पद रिक्त

Rupa Kumari | August 19, 2026 | 04:49 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई के बाद झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ता दिख रहा है। 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से चयनित अधिकारियों की नियुक्तियां प्रभावित होने के बाद डिप्टी कलेक्टर के 207 पद और डीएसपी के 35 पद एक साथ रिक्त हो गए हैं। इससे राज्य में पहले से मौजूद अधिकारियों की कमी और गहरा गई है।

डिप्टी कलेक्टर के करीब 450 पद खाली

जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) में कुल करीब 1450 पद सृजित हैं, जिनमें 850 पद बेसिक ग्रेड (डिप्टी कलेक्टर) के हैं। इनमें लगभग 250 पद पहले से रिक्त थे। अब 11वीं से 13वीं जेपीएससी से चयनित 207 अधिकारियों के हटने के बाद रिक्त पदों की संख्या बढ़कर करीब 450 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक वर्ष का समय लग सकता है, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ेगा।

प्रशिक्षण में थे चयनित अधिकारी

अक्टूबर 2025 में नियुक्ति पाने वाले 207 अधिकारी पहले प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATI) में प्रशिक्षण ले चुके थे। मार्च 2026 से उन्हें विभिन्न जिलों में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। कई अधिकारियों को प्रखंड, अंचल और कार्यपालक दंडाधिकारी जैसी जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। श्रावणी मेले सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विधि-व्यवस्था संबंधी कार्यों में भी उनकी तैनाती की गई थी।

BDO और CO की कमी बढ़ने की आशंका

राज्य में अधिकारियों की कमी पहले से ही गंभीर समस्या रही है। हाल ही में सरकार ने 271 प्रखंड और अंचलों में से केवल 164 स्थानों पर ही अलग-अलग BDO और CO की तैनाती का निर्णय लिया था। शेष 107 प्रखंड और अंचलों में एक ही अधिकारी दोनों पदों का कार्यभार संभाल रहा है। 54 प्रखंडों में BDO, CO का भी कार्य देख रहे हैं। 53 अंचलों में CO को BDO का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अब नई रिक्तियों के बाद यह चुनौती और बढ़ सकती है।

सचिवालयों में 1135 कर्मियों की कमी

JSSC-CGL भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ने से सचिवालयों में भी बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। दिसंबर 2025 में नियुक्ति पाने वाले सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (847) और कनीय सचिवालय सहायक (288) समेत कुल 1135 कर्मी विभिन्न सचिवालयों में कार्यरत थे। इन पदों पर नियुक्त अभ्यर्थियों के हटने से सचिवालयी कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से प्रखंड, अंचल, जिला और सचिवालय स्तर पर कार्यों के निष्पादन पर असर पड़ सकता है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है एक ओर भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना।

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