झारखंड में जुलाई के पहले 10 दिनों तक अच्छी बारिश के आसार, बाद में कमजोर पड़ सकता है मानसून

Rupa Kumari | July 2, 2026 | 10:29 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में जुलाई महीने की शुरुआत अच्छी बारिश के साथ होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 3 जुलाई से उत्तरी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में महीने के पहले 10 दिनों तक अच्छी वर्षा हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के दौरान बीच-बीच में ब्रेक भी देखने को मिल सकता है, जिससे कुछ समय के लिए उमस बढ़ सकती है।

जुलाई के दूसरे पखवाड़े में कमजोर पड़ सकता है मानसून

मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार पूरे जुलाई महीने में सामान्य से सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है। शुरुआती डेढ़ सप्ताह तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है, लेकिन इसके बाद वर्षा की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी एक प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति है। अल नीनो का प्रभाव बढ़ने पर मानसून की गति और वर्षा वितरण प्रभावित हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कृषि क्षेत्र, विशेषकर धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ सकती है।

पिछले वर्षों में ऐसा रहा बारिश का रिकॉर्ड

पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई 2017 में सामान्य से 81 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। वहीं वर्ष 2021 में सामान्य से 42 प्रतिशत और वर्ष 2025 में 19 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। तापमान के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। वर्ष 2020 से 2025 के बीच अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। वर्ष 2025 में जुलाई के दौरान अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

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किसानों के लिए विशेषज्ञों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को शुरुआती अच्छी बारिश का लाभ उठाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले निचले खेतों में धान की रोपाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां पानी का पर्याप्त संचयन हो सकता है। वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों के खेतों में दलहन और तिलहन की खेती को बेहतर विकल्प बताया गया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम की संभावित स्थिति को ध्यान में रखकर फसल योजना बनाने से किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी।

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