Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : साइबर ठगी के एक पुराने मामले में जामताड़ा की जिला एवं सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जिला जज प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी दिवाकर मंडल और मिथुन मंडल को साइबर अपराध का दोषी पाया। दोनों को साइबर एक्ट की धारा 66सी के तहत सजा सुनाई गई।
जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया।
2017 में हुई थी गिरफ्तारी
मामला 11 मार्च 2017 का है। उस समय कर्माटांड़ पुलिस को सूचना मिली थी कि रामपुर गांव में कुछ लोग मोबाइल फोन के माध्यम से साइबर ठगी के अवैध कारोबार में संलिप्त हैं। सूचना के आधार पर तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक अनूप कुजूर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान दिवाकर मंडल और मिथुन मंडल को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके पास से आधा दर्जन मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की थी। जांच में यह भी सामने आया था कि दोनों आरोपी लंबे समय से साइबर ठगी के जरिए अवैध कमाई कर रहे थे।

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सात गवाहों की गवाही से साबित हुआ अपराध
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में सात गवाहों के बयान दर्ज कराए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। गवाहों की गवाही, प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

