रांची की शराब फैक्ट्री में देर रात छापेमारी, पूर्व MLC समेत तीन गिरफ्तार; भेजे गए जेल

Rupa Kumari | July 2, 2026 | 11:39 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : ओरमांझी स्थित तरंगनी ब्लेंडर्स प्राइवेट लिमिटेड में उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित अवैध शराब कारोबार का खुलासा किया है। करीब आठ घंटे तक चली छापेमारी के बाद बिहार के पूर्व एमएलसी सुभोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और फैक्ट्री कर्मचारी रवीकांत राय को गिरफ्तार किया गया। तीनों आरोपियों को बुधवार देर रात बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में तैयार शराब पर दूसरे राज्यों के नामी ब्रांडों के कथित फर्जी लेबल लगाकर उसे बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही थी। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में शराब बरामद की गई, जिन पर “For Sale in Uttar Pradesh” और “For Sale in Delhi” जैसे लेबल लगे हुए थे।

बड़ी मात्रा में शराब जब्त

कार्रवाई के दौरान पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने फैक्ट्री से विभिन्न ब्रांडों की शराब और बीयर की बड़ी खेप जब्त की। जब्त सामग्री में किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर की 70 पेटी, आफ्टर डार्क ब्लू की 218 पेटी, 8 पीएम की 7 पेटी और रॉयलसन गोल्ड व्हिस्की की 78 पेटी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन उत्पादों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और उनकी आपूर्ति किन क्षेत्रों में की जानी थी।

लाइसेंस उल्लंघन और राजस्व नुकसान की आशंका

जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि फैक्ट्री में लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करते हुए विदेशी शराब का गलत स्टॉक रखा गया था। अधिकारियों को संदेह है कि फर्जी ब्रांडिंग और लेबलिंग के जरिए बिहार समेत अन्य राज्यों में शराब की अवैध आपूर्ति की जा रही थी, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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उत्पाद विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। नियमों के तहत प्रत्येक शराब फैक्ट्री में विभाग का एक बॉन्ड अधिकारी तैनात रहता है, जिसकी जिम्मेदारी उत्पादन और स्टॉक की निगरानी करना होती है। इसके बावजूद फैक्ट्री में कथित तौर पर फर्जी लेबलिंग और अवैध आपूर्ति की तैयारी सामने आने से निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि इसी फैक्ट्री पर करीब दो वर्ष पहले भी उत्पाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसे सील किया था। फिलहाल पुलिस और उत्पाद विभाग मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहे हैं और संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

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