झारखंड के 12 जिलों पर सूखे का खतरा, राज्य में अब तक 54% कम बारिश

Meenu | July 1, 2026 | 03:22 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड में कम बारिश ने सूखे की आशंका बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ‘अलनीनो’ के मजबूत होने से देश के कई हिस्सों में कम वर्षा की स्थिति बन सकती है। IMD के अनुसार देश के लगभग 197 जिलों पर अलनीनो का असर पड़ने की संभावना है, जिनमें झारखंड के 12 जिले भी शामिल हैं।

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झारखंड में सामान्य से 54% कम बारिश

मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में अब तक सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 30 जून तक राज्य में केवल 86.5 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य तौर पर करीब 190 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी। सबसे खराब स्थिति पलामू प्रमंडल के जिलों की बताई जा रही है। गढ़वा में 93% कम बारिश, पलामू में 80% कम बारिश, चतरा में 78% कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य के लगभग सभी जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

सरकार ने तैयार की आकस्मिक फसल योजना

कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘आकस्मिक फसल योजना’ तैयार कर ली है। सरकार ने सभी जिलों के कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती और धान की खेती प्रभावित होती है, तो किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके तहत मोटा अनाज, दलहन और तेलहन की खेती पर जोर दिया जाएगा।

अलनीनो की स्थिति हुई मजबूत

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र के प्रभारी डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि जून 2026 के अलनीनो बुलेटिन के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अलनीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के कई हिस्सों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहा।

किसानों के लिए बीज सुरक्षित

कृषि निदेशक बिद्यानंद शर्मा पंकज ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि मोटा अनाज, दलहन और तेलहन के बीज नेशनल सीड कॉरपोरेशन के पास सुरक्षित रखे गए हैं। सरकार 15 जुलाई तक बारिश की स्थिति पर नजर रखेगी। इसके बाद जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक खेती योजना को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।

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