झारखंड में भाषा विवाद पर नहीं बनी सहमति, अंतिम फैसला लेंगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

Meenu | May 22, 2026 | 02:08 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड में क्षेत्रीय भाषा विवाद को लेकर महागठबंधन के भीतर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने के मुद्दे पर गठबंधन दलों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और राजद इन भाषाओं को सूची में शामिल करने के पक्ष में हैं, जबकि JMM इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक विचार करने की बात कह रही है।

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भाषा और स्थानीय पहचान पर बढ़ी बहस

भाषा विवाद ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इसे स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है महागठबंधन के भीतर इस विषय पर लगातार मंथन चल रहा है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

सुदिव्य कुमार सोनू ने उठाई नई मांग

इस बीच राज्य सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाषा समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी समुदायों और वर्गों की राय को महत्व मिल सके।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ले सकते हैं अंतिम फैसला

सूत्रों के अनुसार अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय हेमंत सोरेन के स्तर पर लिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सभी पक्षों की राय लेने के बाद अंतिम फैसला करेंगे। ऐसे में अब राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हुई है।

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