Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में लंबित मांगों को लेकर डॉक्टरों ने सोमवार, 12 अक्टूबर से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। डॉक्टरों के संगठनों के मुताबिक, इस आंदोलन में जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े करीब 20 हजार डॉक्टर शामिल हो सकते हैं। संगठनों ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए 21 अक्टूबर तक का समय दिया है। इसके बाद भी समाधान नहीं निकलने पर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। आंदोलन के पहले चरण में 20 अक्टूबर तक डॉक्टर काली पट्टी पहनकर मरीजों का इलाज करेंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) लागू करना, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बनाना शामिल है।
वित्तीय लाभ के मामले में बिहार से पांच साल पीछे झारखंड के डॉक्टर
झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (JSHSA) के सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह ने कहा कि वित्तीय लाभ के मामले में झारखंड के सरकारी डॉक्टर बिहार के डॉक्टरों से करीब पांच साल पीछे हैं। उनके अनुसार, बिहार में डॉक्टरों को 20 साल की सेवा अवधि में चार बार वित्तीय लाभ मिलता है, जबकि झारखंड में इसी प्रक्रिया में 25 साल लग जाते हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार को भी बिहार की तर्ज पर नियम बनाने चाहिए, ताकि डॉक्टरों को समय पर वित्तीय लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से जुड़े नियम 2015 में बनाए गए थे, लेकिन पिछले 11 वर्षों में उनके लिए DACP के नियम नहीं बन पाए हैं। डॉक्टरों की मांग है कि सरकार इस पर जल्द निर्णय ले।
50 बेड तक के अस्पतालों को कानून से छूट देने की मांग
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की झारखंड इकाई ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन की मांग की है। संगठन का कहना है कि 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को इस कानून से छूट दी जानी चाहिए। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। वहीं, 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों के लिए कानून के तहत स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों ने अपनी जरूरतों के अनुसार इस कानून में बदलाव किए हैं। झारखंड में भी इसी तरह संशोधन किया जाना चाहिए।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए बने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट
डॉक्टरों के आंदोलन में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की मांग भी शामिल है। डॉक्टरों के संगठनों का कहना है कि अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून जरूरी है। JSHSA के सचिव डॉ. मृत्युंजय सिंह के अनुसार, इस तरह का कानून बनने से अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
सितंबर में मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुका है IMA
डॉक्टरों की मांगों को लेकर IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक ने सितंबर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा था। उन्होंने चिकित्सा संगठनों की मांगों पर विचार करने और डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान करने की अपील की थी। अब डॉक्टरों के संगठनों ने आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके तहत 20 अक्टूबर तक काली पट्टी पहनकर काम किया जाएगा और 21 अक्टूबर को सांकेतिक हड़ताल होगी। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। यदि हड़ताल होती है, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।



















