Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी। राज्य सरकार की ओर से 2025 में संशोधित DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली की वैधता को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए हैं। इस मामले का असर झारखंड की वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी पड़ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी नियुक्ति रद्द करने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
नई नियुक्ति नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
खबर के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने झारखंड सरकार की संशोधित नियमावली पर सवाल उठाए। अदालत ने प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में पुलिस सुधारों को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि नए नियम प्रथम दृष्टया उन निर्देशों के अनुरूप नहीं दिखते। झारखंड सरकार ने पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 46(2) और 46(3) के तहत नई नियमावली अधिसूचित की थी। इसके तहत छह महीने से कम सेवा शेष रहने पर भी किसी अधिकारी को कार्योत्तर सेवा का लाभ देकर DGP पद के लिए योग्य माना जा सकता है। इसी प्रावधान की वैधता पर न्यायिक समीक्षा हो रही है।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर क्या पड़ेगा असर?
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि यदि विवादित प्रावधान को अवैध या असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाता है, तो उसके आधार पर हुई नियुक्ति भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, अभी उनकी नियुक्ति को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत सुप्रीम कोर्ट ने तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही है। राज्य सरकार को उन्हें नोटिस तामील कराने का निर्देश भी दिया गया है।
सरकार को जवाब दाखिल करने का अवसर
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को विवादित नियम पर पुनर्विचार करने या अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया है। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को न्याय मित्र (अमिकस क्यूरी) के रूप में नियमावली की वैधता पर सहायता देने को कहा है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भी इस प्रक्रिया में न्याय मित्र की मदद करने का निर्देश दिया गया है।
3 नवंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
अब इस मामले में 3 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। इस दौरान राज्य सरकार का पक्ष, विवादित नियमावली की वैधता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। अदालत के अगले आदेश से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमावली को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और इसका वर्तमान DGP की नियुक्ति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।





















