Israel–Iran टकराव ने लिया युद्ध जैसा रूप, इज़रायल में ‘विशेष आपातकाल’ लागू

Rupa Kumari | February 28, 2026 | 01:54 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची : मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इज़रायल और ईरान के बीच तनाव अब खुली जंग की ओर बढ़ता दिख रहा है। इज़रायल ने ईरान पर ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ (पूर्व-निवारक हमला) करने का दावा किया है। इसके बाद तेहरान में कई धमाकों की खबरें सामने आईं। इज़रायल ने इस सैन्य अभियान को “शील्ड ऑफ जुडा” नाम दिया है। हालात को देखते हुए पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया गया है।

तेहरान में ताबड़तोड़ धमाके

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान के कई इलाकों में जोरदार विस्फोट सुने गए। यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जोमहूरी जैसे रिहायशी क्षेत्रों में मिसाइल गिरने की खबरें हैं। कई इमारतों से धुएं का गुबार उठता देखा गया। हालांकि, अब तक ईरान की ओर से किसी आधिकारिक हताहत आंकड़े की पुष्टि नहीं की गई है। खबरें यह भी हैं कि पवित्र शहर क़ोम के आसपास भी हमले की आशंका जताई गई है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

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अमेरिका की भूमिका

सूत्रों के मुताबिक इस ऑपरेशन में संयुक्त राज्य अमेरिका भी इज़रायल का समर्थन कर रहा है। अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की भागीदारी की चर्चाएं हैं। अमेरिका की ओर से बयान आया है कि उसकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं। इससे यह टकराव क्षेत्रीय संघर्ष का व्यापक रूप ले सकता है।

इज़रायल में हाई अलर्ट

हमले के तुरंत बाद इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने पूरे देश में ‘विशेष आपातकाल’ घोषित कर दिया। इज़रायली रक्षा बल (IDF) ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजकर उन्हें सुरक्षित ठिकानों के पास रहने की सलाह दी है। कई शहरों में सायरन बज रहे हैं, जो संभावित मिसाइल या ड्रोन हमलों की चेतावनी दे रहे हैं।

स्कूल-कॉलेज बंद, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द

बढ़ते खतरे को देखते हुए देशभर के स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और भीड़ जुटने पर रोक लगा दी गई है। कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई है। सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

क्यों किया गया हमला?

इज़रायल का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है। रक्षा मंत्री के अनुसार, संभावित बड़े हमलों को रोकने के लिए पहले कदम उठाना जरूरी था। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। यदि हालात काबू में नहीं आए, तो यह टकराव पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।

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