Samachar Post डेस्क, रांची : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि दुनिया जब युद्ध और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब बातचीत और कूटनीति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि युद्ध का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव दूसरे देशों पर भी पड़ता है। ऐसे हालात में संसदें वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
संसद भवन परिसर में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन
भारत की मेजबानी में सोमवार सुबह संसद भवन परिसर में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का शुभारंभ हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में 21 देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने ब्रिक्स देशों की सामूहिक ताकत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है। ऐसे में वैश्विक चुनौतियों से निपटने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने में इन देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

जन-केंद्रित विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर मंथन
इस बार ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन की थीम ‘जन-केंद्रित विकास के लिए सशक्त संसदों का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने, नागरिक-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने और विधायी संस्थाओं की भूमिका बेहतर बनाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। ओम बिरला ने जोर दिया कि संसदें संवाद, सहयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकती हैं।
ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मिलेंगे प्रधानमंत्री मोदी
कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इस सम्मेलन को सदस्य और साझेदार देशों के बीच संसदीय संवाद बढ़ाने तथा साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।





















